वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई FSDC की 30वीं बैठक में AI के खतरों और ग्लोबल अनिश्चितता से निपटने पर चर्चा हुई। बैंकों के लिए नई साइबर सुरक्षा रणनीति और विदेशी निवेशकों के लिए डिजिटल KYC को आसान बनाने का फैसला लिया गया है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अगुवाई में हुई FSDC की 30वीं बैठक में बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर के लिए एक नया एजेंडा तैयार किया गया है। काउंसिल ने साफ किया है कि आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI) का बढ़ता इस्तेमाल और ग्लोबल जियोपॉलिटिकल तनाव वित्तीय स्थिरता के लिए नए जोखिम पैदा कर रहे हैं, जिन पर पैनी नजर रखने की जरूरत है।
बैंक और साइबर सुरक्षा
बैठक का सबसे बड़ा अपडेट 'यूनिफाइड फाइनेंशियल सेक्टर साइबर सिक्योरिटी स्ट्रेटेजी' है। इसका मकसद कोर फाइनेंशियल सिस्टम को सुरक्षित करना है, खासकर रीजनल रूरल बैंकों (RRBs) को, जो डिजिटल खतरों के प्रति अधिक संवेदनशील हैं। निवेशकों के लिए इसका मतलब है कि बैंकों का टेक्नोलॉजी और साइबर सिक्योरिटी पर खर्च बढ़ सकता है, जिससे बैंकिंग स्टॉक पर नजर रखना जरूरी होगा।
ULI और क्रेडिट एक्सेस
सरकार अब डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर दे रही है। 'यूनिफाइड लेंडिंग इंटरफेस' (ULI) और 'अकाउंट एग्रीगेटर फ्रेमवर्क' के जरिए MSMEs को लोन मिलना अब पहले से कहीं ज्यादा आसान और सस्ता हो जाएगा। इसका लक्ष्य क्रेडिट प्रोसेसिंग की जटिलताओं को कम कर आर्थिक गतिविधियों को रफ्तार देना है।
विदेशी निवेशकों के लिए आसान राह
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) और NRI निवेशकों के लिए डिजिटल-फर्स्ट KYC प्रक्रिया को आसान बनाया जाएगा। साथ ही, गिफ्ट सिटी (GIFT IFSC) के माध्यम से भारत में पूंजी के प्रवाह (Capital Flow) को बढ़ाने पर विशेष चर्चा हुई है।
अनक्लेम्ड एसेट्स पर बड़ा एक्शन
सरकार अब उन पैसों की रिकवरी पर भी ध्यान दे रही है जो बैंकों, डिविडेंड या इंश्योरेंस फंड में सालों से लावारिस पड़े हैं। इस पहल से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि फंसा हुआ पैसा दोबारा सिस्टम में लौटेगा। आने वाले महीनों में इन नई रणनीतियों के लागू होने से बैंकों के कंप्लायंस खर्च और डिजिटल एडॉप्शन की गति बाजार के लिए अहम संकेत साबित होंगे।
