सितंबर 2026 में Foreign Portfolio Investors (FPIs) ने भारतीय बाजारों से किनारा कर लिया है। विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों से ₹7,443 करोड़ की निकासी की है, जिससे दो महीने से चल रही खरीदारी का सिलसिला टूट गया है।
जुलाई और अगस्त में भारतीय बाजार में जबरदस्त खरीदारी करने वाले विदेशी निवेशक अब बिकवाली की राह पर हैं। इन दो महीनों में FPIs ने बाजार में ₹51,119 करोड़ का निवेश किया था, लेकिन सितंबर में यह ट्रेंड पूरी तरह बदल गया है।
बिकवाली की असली वजह
बाजार में इस बिकवाली के पीछे ग्लोबल मैक्रो-इकोनॉमिक कारण मुख्य हैं। अमेरिका में Bond Yields बढ़ने और डॉलर में मजबूती आने से ग्लोबल निवेशक भारतीय जैसे इमर्जिंग मार्केट्स से पैसा निकालकर अमेरिकी सुरक्षित एसेट्स में लगा रहे हैं। इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने भी घरेलू इन्फ्लेशन और करेंट अकाउंट बैलेंस को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
प्रॉफिट बुकिंग का दौर
भारतीय शेयरों के ऊंचे वैल्यूएशन को देखते हुए विदेशी फंड्स अब अपने पोर्टफोलियो को री-बैलेंस कर रहे हैं। खासतौर पर मिड-कैप और स्मॉल-कैप सेगमेंट में विदेशी निवेशकों ने जमकर मुनाफा वसूली (Profit Booking) की है, जहां पिछले कुछ महीनों में शानदार तेजी देखी गई थी।
डेट मार्केट पर भी दबाव
यह बिकवाली सिर्फ इक्विटी तक सीमित नहीं है। विदेशी निवेशकों ने डेट मार्केट से भी पैसा निकालना शुरू कर दिया है। 'फुल्ली एक्सेसिबल रूट' (FAR) और 'वॉलंटरी रिटेंशन रूट' (VRR) में निकासी यह बताती है कि निवेशक जोखिम लेने से बच रहे हैं। आपको बता दें कि 2026 में भारतीय इक्विटी से कुल आउटफ्लो ₹2.32 लाख करोड़ तक पहुंच चुका है, जो 2025 के पूरे साल की कुल निकासी से भी ज्यादा है।
अब निवेशकों की नजरें कहां?
बाजार की नजरें अब घरेलू इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) पर टिकी हैं कि क्या वे इस खाली जगह को भर पाएंगे। आने वाले समय में अमेरिका के इन्फ्लेशन डेटा और फेडरल रिजर्व के फैसलों पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा। अगर अमेरिका से और भी सख्त संकेत आते हैं, तो यह बिकवाली का दौर बाजार में शॉर्ट टर्म के लिए और अस्थिरता (Volatility) पैदा कर सकता है।
