भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बरकरार है। अक्टूबर में फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) ने भारतीय इक्विटी से **₹48,056 करोड़** की बड़ी निकासी की है। इसके अलावा Reliance Industries में असामान्य हलचल, Blinkit का आक्रामक विस्तार और 11 बड़े पोर्ट्स के कॉरपोरेटाइजेशन का सरकार का बड़ा फैसला चर्चा में है।
भारतीय शेयर बाजार इस समय विदेशी निवेशकों की आक्रामक बिकवाली के भारी दबाव से गुजर रहा है। आंकड़ों के अनुसार, 23 अक्टूबर 2026 तक FPIs ने बाजार से ₹48,056 करोड़ निकाल लिए हैं। साल-दर-साल (YTD) आधार पर अब तक कुल ₹3.10 ट्रिलियन का निवेश बाजार से बाहर जा चुका है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस पूंजी के पलायन के पीछे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और डॉलर की मजबूती को मुख्य वजह बताया है।
Reliance Industries में असामान्य ट्रेडिंग
Reliance Industries के शेयरों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। दो मार्केट पार्टिसिपेंट्स द्वारा ली गई लेवरेज्ड पोजीशन अब 'मार्केटवाइड पोजीशन लिमिट' के 3% से ऊपर निकल गई है, जो काफी दुर्लभ है। यह हलचल तब हो रही है जब कंपनी का शेयर अपने 52-वीक लो के करीब ट्रेड कर रहा है। एक्सपर्ट्स इसे Jio Platforms से जुड़ी भविष्य की संभावनाओं से जोड़कर देख रहे हैं।
क्विक-कॉमर्स और पोर्ट्स में बड़ा बदलाव
Eternal ने अपनी कंपनी Blinkit के लिए आक्रामक रणनीति अपनाई है। कंपनी का लक्ष्य मार्च 2027 तक डार्क स्टोर्स की संख्या को 3,500 तक ले जाना है, जबकि पिछली तिमाही में कंपनी का कैश आउटफ्लो ₹1,800 करोड़ से अधिक रहा था। निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि कंपनी इतनी तेजी के बीच अपना प्रॉफिट मार्जिन कैसे मैनेज करेगी।
वहीं, इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। 2030 तक भारत के 12 में से 11 प्रमुख बंदरगाहों (Ports) को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कर इंडिपेंडेंट बोर्ड-गवर्नड कॉरपोरेट इकाइयों में बदला जाएगा। इस फैसले का मकसद एडमिनिस्ट्रेटिव मैनेजमेंट की जगह प्राइवेट सेक्टर जैसी कार्यकुशलता लाना है, जिससे डिसीजन मेकिंग तेज हो सके और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप को बढ़ावा मिल सके।
