ग्लोबल मार्केट से मिले खराब संकेतों के चलते विदेशी निवेशकों (FPIs) ने भारतीय सरकारी सिक्योरिटीज से किनारा कर लिया है। 9 सितंबर से 15 सितंबर के बीच निवेशकों ने बाजार से **₹5,109.21 करोड़** की बड़ी निकासी की है।
निकासी की मुख्य वजह
बाजार में इस बिकवाली के पीछे ग्लोबल रिस्क एनवायरनमेंट में बदलाव एक बड़ी वजह है। मौजूदा समय में 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 5% के स्तर को पार कर चुकी है। जब अमेरिका में सुरक्षित निवेश पर बेहतर रिटर्न मिलता है, तो विदेशी निवेशक उभरते हुए बाजारों से पैसा निकालकर वहां शिफ्ट करना पसंद करते हैं। इसके अलावा, ब्रेंट क्रूड ऑयल के दाम $107 प्रति बैरल के पार बने हुए हैं, जिससे भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों के लिए महंगाई और ट्रेड डेफिसिट का जोखिम बढ़ गया है।
रुपया और बॉन्ड मार्केट पर असर
इस निकासी का सीधा असर भारतीय रुपये पर भी दिख रहा है, जो डॉलर के मुकाबले 95.96 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। जैसे-जैसे रुपया कमजोर होता है, विदेशी निवेशकों की होल्डिंग की वैल्यू डॉलर टर्म में कम हो जाती है, जिससे और ज्यादा बिकवाली का डर बना रहता है। बॉन्ड मार्केट के लिए यह अस्थिरता चिंताजनक है, क्योंकि बिकवाली बढ़ने से बॉन्ड की कीमतें गिरती हैं और यील्ड ऊपर जाती है, जिससे सरकार और कॉर्पोरेट जगत के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाता है।
निवेशकों के लिए आगे की राह
मौजूदा स्थिति पूरी तरह से बाहरी कारकों पर निर्भर है। निवेशकों को अब अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों पर पैनी नजर रखने की जरूरत है। साथ ही, भारतीय रुपये में स्थिरता बहुत जरूरी है, क्योंकि अगर गिरावट का दौर जारी रहा, तो विदेशी फंडों की वापसी की राह और कठिन हो सकती है। हालांकि यह बिकवाली भारतीय बॉन्ड्स की गुणवत्ता का मुद्दा नहीं, बल्कि ग्लोबल पोर्टफोलियो एडजस्टमेंट का नतीजा है, लेकिन यह बाजार के लिए एक अलर्ट जरूर है।
