FPIs का भारतीय मार्केट में जोरदार वापसी! जुलाई में ₹20,200 करोड़ का निवेश

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AuthorNeha Patil|Published at:
FPIs का भारतीय मार्केट में जोरदार वापसी! जुलाई में ₹20,200 करोड़ का निवेश

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने जुलाई महीने में भारतीय शेयर बाजार में जोरदार वापसी की है। 4 महीने की लगातार बिकवाली के बाद, FPIs ने इस महीने ₹20,200 करोड़ का शुद्ध निवेश किया है। यह भारतीय बाजार में उनकी रुचि लौटने का संकेत है।

क्यों लौटी विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी?

विदेशी निवेशकों की इस वापसी के पीछे कई अहम कारण बताए जा रहे हैं। बाजार के जानकारों का मानना है कि भारतीय बाजार में वैल्यूएशन (Valuation) अन्य उभरते बाजारों की तुलना में आकर्षक हो गए हैं। इसके अलावा, भारत की कंपनियों के अप्रैल-जून तिमाही के नतीजे उम्मीद के मुताबिक रहे हैं, खासकर IT सेक्टर ने बाजार की चिंता को कम किया है।

वैश्विक स्तर पर, अमेरिकी डॉलर के नरम पड़ने और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी के रुकने की उम्मीदों ने भी उभरते बाजारों (Emerging Markets) में निवेश को बढ़ावा दिया है। भारतीय रुपये की स्थिरता ने भी विदेशी निवेशकों के लिए करेंसी जोखिम (Currency Risk) को कम किया है।

सिर्फ शेयर बाजार ही नहीं, बॉन्ड मार्केट में भी दिखी चमक

यह निवेश सिर्फ इक्विटी तक ही सीमित नहीं रहा। FPIs ने जुलाई में भारतीय बॉन्ड (Debt Instruments) में भी जमकर पैसा लगाया है। उन्होंने जनरल डेट रूट (General Debt Route) के जरिए ₹29,212 करोड़ और फुली एक्सेसिबल रूट (Fully Accessible Route) के जरिए ₹3,033 करोड़ का निवेश किया है। इससे पता चलता है कि निवेशक सिर्फ शेयर के जोखिम पर ही नहीं, बल्कि स्थिर रिटर्न (Stable Returns) वाले फिक्स्ड इनकम एसेट्स (Fixed Income Assets) में भी रुचि दिखा रहे हैं।

आगे क्या?

हालांकि, जुलाई के आंकड़े सकारात्मक हैं, लेकिन साल के बाकी हिस्से के लिए कुछ प्रमुख बातों पर नजर रखनी होगी। भू-राजनीतिक विकास (Geopolitical Developments), खासकर अमेरिका-ईरान क्षेत्र की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों और भारत के आयात बिल को प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा, 5 अगस्त को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) का ऐलान एक अहम मोड़ होगा। RBI का ब्याज दरों और लिक्विडिटी (Liquidity) पर रुख निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण संकेत देगा। साथ ही, Q1 FY27 नतीजों के आते रहने के बीच, कंपनियों के नतीजों में निरंतरता (Consistency) यह तय करेगी कि यह निवेश की वापसी लंबी अवधि की है या सिर्फ एक रणनीतिक बदलाव।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.