अगस्त के महीने में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय शेयर बाजार पर बड़ा भरोसा दिखाया है। पिछले **2** महीनों से जारी खरीदारी के दौर में निवेशकों ने **₹30,919 करोड़** का भारी निवेश किया है, जो बाजार के सेंटीमेंट में सुधार का संकेत है।
बाजार में लौटा विदेशी भरोसा
जुलाई में ₹20,200 करोड़ के निवेश के बाद, अगस्त में FPIs का रुख और भी सकारात्मक रहा है। हालांकि, साल 2026 की शुरुआत काफी उतार-चढ़ाव भरी रही थी। साल-दर-साल (YTD) के आंकड़ों पर नजर डालें, तो अब भी विदेशी निवेशक नेट सेलर बने हुए हैं। कुल आउटफ्लो ₹2.23 लाख करोड़ से ₹2.30 लाख करोड़ के बीच बना हुआ है, जो कि पूरे 2025 के ₹1.66 लाख करोड़ के कुल आउटफ्लो को पीछे छोड़ चुका है।
क्यों लौट रहे हैं निवेशक?
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इसके पीछे दो मुख्य कारण हैं:
- घरेलू मजबूती: भारतीय रुपये में स्थिरता और जून तिमाही के शानदार कॉरपोरेट अर्निंग्स ने निवेशकों का भरोसा जीता है।
- ग्लोबल री-एलोकेशन: दुनिया भर के निवेशक अब उन बाजारों से पैसा निकाल रहे हैं जहां सेमीकंडक्टर और चिप-मेकिंग का बहुत ज्यादा एक्सपोजर था (जैसे ताइवान और साउथ कोरिया) और इंडिया जैसे उभरते हुए ग्रोथ मार्केट्स का रुख कर रहे हैं।
रिस्क फैक्टर और चिंताएं
बाजार में जोश तो है, लेकिन चुनौतियां खत्म नहीं हुई हैं। कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में हलचल, यूएस बॉन्ड यील्ड्स और मिड-कैप व स्मॉल-कैप सेगमेंट में 'हाई वैल्यूएशन' निवेशकों के लिए चिंता का सबब बने हुए हैं। इसके अलावा, F&O सेगमेंट में नए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन जैसे नियमों से बाजार में वोलेटिलिटी (Volatility) बनी हुई है। आने वाले समय में फेडरल रिजर्व की पॉलिसी और भारत के जीडीपी आंकड़े बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
