FPIs का भारतीय बाजार से मोहभंग या बड़ा बदलाव? ग्लोबल संकेतों के बीच बदल रही है निवेश की चाल

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
FPIs का भारतीय बाजार से मोहभंग या बड़ा बदलाव? ग्लोबल संकेतों के बीच बदल रही है निवेश की चाल

भारतीय शेयर बाजार से FPIs की निकासी लगातार जारी है, लेकिन एक्सपर्ट्स इसे AI की कमी नहीं बल्कि एक ग्लोबल ट्रेंड मान रहे हैं। साल 2026 में इमर्जिंग एशियाई बाजारों से करीब **$190 बिलियन** की पूंजी बाहर निकली है।

भारतीय बाजारों से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) का पैसा बाहर जाना चिंता का विषय बना हुआ है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत की किसी कमी की वजह से नहीं, बल्कि एक बड़े ग्लोबल शिफ्ट का हिस्सा है। डेटा के अनुसार, साल 2026 में अब तक इमर्जिंग एशियाई अर्थव्यवस्थाओं से करीब $190 बिलियन की निकासी हुई है। दिलचस्प बात यह है कि कोरिया और ताइवान जैसे देश, जो टेक्नोलॉजी और AI सेक्टर में काफी आगे हैं, वहां से भी भारत की तुलना में ज्यादा पूंजी निकली है। इससे साफ है कि यह बिकवाली जियोपॉलिटिकल अस्थिरता, ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव और ग्लोबल ट्रेड टैरिफ जैसे कारणों से हो रही है।

दिग्गज कंपनियों (Large-Caps) से क्यों दूरी?

बाजार में एक बड़ा बदलाव यह आया है कि विदेशी निवेशकों का भरोसा टॉप 10 कंपनियों से कम हुआ है। Reliance Industries, HDFC Bank और Infosys जैसे दिग्गजों में विदेशी होल्डिंग मार्च 2022 के 40.9% से गिरकर मार्च 2026 तक 21.3% रह गई है। निवेशकों का मानना है कि ये कंपनियां नई इनोवेशन या कैपेसिटी बढ़ाने के बजाय सिर्फ डिविडेंड देने पर जोर दे रही हैं, जिससे इनकी ग्रोथ सुस्त पड़ गई है।

इंफ्रास्ट्रक्चर बना नया पसंदीदा डेस्टिनेशन

निवेशक अब भारतीय बाजार से पूरी तरह बाहर नहीं जा रहे हैं, बल्कि अपने पोर्टफोलियो को रिलोकेट कर रहे हैं। अब पैसा पावर जनरेशन, इलेक्ट्रिकल स्विचगियर, ऑप्टिकल केबलिंग और इंडस्ट्रियल कूलिंग जैसी कंपनियों में जा रहा है। ये वे 'पिक्स एंड शवल्स' हैं जिनकी ग्लोबल AI और डेटा सेंटर क्रांति को आगे बढ़ाने के लिए सख्त जरूरत है।

निवेशकों के लिए आगे की राह

रिटेल निवेशकों को दो बातों पर बारीक नजर रखनी चाहिए। पहला, क्या पुरानी दिग्गज कंपनियां अपने निवेश और इनोवेशन को बढ़ाकर फिर से ग्रोथ की राह पर लौटेंगी? दूसरा, इंफ्रा सेक्टर की कंपनियों के पास मौजूद ऑर्डर बुक क्या उनकी वैल्यूएशन को सही साबित कर पाएंगे? ग्लोबल मैक्रो फैक्टर्स के चलते बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहेगा, लेकिन बेहतर फंडामेंटल वाली कंपनियां इस दौर में भी मजबूत बनी रह सकती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.