FPI Outflows: विदेशी निवेशकों की बिकवाली में सुस्ती, भारत पर घटा दबाव

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AuthorNeha Patil|Published at:
FPI Outflows: विदेशी निवेशकों की बिकवाली में सुस्ती, भारत पर घटा दबाव

भारतीय शेयर बाजार से फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPI) की बिकवाली की रफ्तार धीमी हो गई है। पिछले हफ्ते केवल **$10 करोड़** का आउटफ्लो देखा गया, जो पहले के हफ्तों के मुकाबले राहत की बात है।

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय इक्विटी में अपनी बिकवाली की गति को कुछ हद तक धीमा कर दिया है। पिछले तीन हफ्तों में जहां बिकवाली $17 करोड़ से $36.6 करोड़ के बीच चल रही थी, वहीं पिछले हफ्ते यह घटकर महज $10 करोड़ रह गई है। हालांकि, यह राहत अस्थायी लग रही है क्योंकि सितंबर 2023 के बाद से आया विदेशी निवेश अब पूरी तरह से बाजार से बाहर निकल चुका है।

एशियाई बाजारों में बड़ी हलचल

भारत में बिकवाली धीमी होने की एक वजह यह भी है कि एशियाई क्षेत्र के अन्य देशों में दबाव काफी बढ़ गया है। ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों से लगातार पांचवें हफ्ते भारी निकासी हो रही है। इस क्षेत्रीय बदलाव के कारण अंतरराष्ट्रीय फंड अब भारत के मुकाबले अन्य एशियाई केंद्रों से अधिक पैसा निकाल रहे हैं।

साल 2026: निकासी के आंकड़े चौंकाने वाले

भले ही साप्ताहिक निकासी कम हुई हो, लेकिन साल 2026 के कुल आंकड़े चिंताजनक हैं। सितंबर के पहले हफ्ते में ही निवेशकों ने ₹7,443 करोड़ निकाले। इस साल अब तक कुल आउटफ्लो ₹2.32 लाख करोड़ पहुंच चुका है, जो पिछले पूरे साल के ₹1.66 लाख करोड़ के आंकड़े को पीछे छोड़ चुका है।

करेंसी और ग्लोबल दबाव

रुपया डॉलर के मुकाबले 95.79 के स्तर के करीब कमजोर हुआ है, जिसमें महज 3 दिनों में 1% से ज्यादा की गिरावट आई है। क्रूड ऑयल की कीमतें $100 प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं, जो भारत जैसे ऑयल-इंपोर्टर देश के लिए बड़ा सिरदर्द है। साथ ही, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती के चलते निवेशक सुरक्षित बाजारों की ओर रुख कर रहे हैं। आने वाले दिनों में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों और कच्चे तेल की कीमतों पर निवेशकों की पैनी नजर रहेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.