देश के प्रमुख शहरों में FMCG बिक्री का **21%** अब ई-कॉमर्स के जरिए हो रहा है, जो पारंपरिक रिटेल के लिए एक बड़े बदलाव का संकेत है। हालांकि, ग्रामीण बाजारों में कमजोरी के कारण पूरे FMCG सेक्टर का वॉल्यूम **2%** तक गिर गया है।
भारत के एफएमसीजी (FMCG) सेक्टर में डिजिटल रिटेल की तरफ एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। देश के 8 बड़े मेट्रो शहरों में कुल बिक्री का 21% हिस्सा अब ऑनलाइन हो चुका है, जो पिछली तिमाही में 19% था। क्विक-कॉमर्स और डिजिटल ऐप्स के बढ़ते चलन ने पारंपरिक दुकानों के कारोबार को प्रभावित करना शुरू कर दिया है।
पारंपरिक रिटेल पर दबाव
हालांकि, पारंपरिक व्यापार अभी भी 81% बाजार पर कब्जा जमाए हुए है, लेकिन जून तिमाही में इसकी हिस्सेदारी में 4% की कमी आई है। इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में कंजम्पशन (खपत) का धीमा होना है।
छोटे शहरों में रफ्तार
NielsenIQ के आंकड़ों के अनुसार, नॉन-मेट्रो इलाकों में ग्रोथ मेट्रो शहरों के मुकाबले 3 गुना तेज है। इससे साफ है कि पर्सनल केयर और दैनिक उपयोग के सामान खरीदने की आदत अब बड़े शहरों तक सीमित नहीं रही है। Nestle India और Marico जैसी बड़ी कंपनियां अब अपनी रणनीति बदल रही हैं। Nestle का ई-कॉमर्स योगदान 2021 के बाद से दोगुना हो गया है, जबकि Marico अपनी घरेलू रेवेन्यू का 20% से ज्यादा हिस्सा डिजिटल और क्विक-कॉमर्स चैनलों से हासिल कर रही है।
क्या सेक्टर की ग्रोथ टिकाऊ है?
पूरे सेक्टर की वैल्यू में महज 0.8% की ग्रोथ दिखी है, जिसे 2.8% की कीमतों में बढ़ोतरी के जरिए संभाला गया है। हकीकत यह है कि जून तिमाही में इंडस्ट्री का कुल वॉल्यूम 2% कम हुआ है। यह आंकड़े इशारा करते हैं कि सेक्टर की मौजूदा ग्रोथ काफी हद तक कीमतों में उछाल पर टिकी है, जो महंगाई के इस दौर में भविष्य के लिए एक चिंता का विषय बन सकता है।
