Industrial Corridor: 134 फैक्ट्रियों में प्रोडक्शन शुरू, FM सीतारमण का बड़ा निर्देश!

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Industrial Corridor: 134 फैक्ट्रियों में प्रोडक्शन शुरू, FM सीतारमण का बड़ा निर्देश!

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत के इंडस्ट्रियल कॉरिडोर प्रोजेक्ट्स में प्रोडक्शन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। फिलहाल 134 यूनिट्स चालू हैं और सरकार अब जमीन आवंटन से हटकर असल मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट पर ध्यान केंद्रित कर रही है। निवेशकों के लिए, 'प्लग-एंड-प्ले' इंफ्रास्ट्रक्चर पर यह जोर मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में ग्रोथ के मौके दिखा रहा है।

प्रोडक्शन पर फोकस, जमीन आवंटन पर नहीं!

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत के इंडस्ट्रियल कॉरिडोर प्रोजेक्ट्स में काम की रफ्तार बढ़ाने की जोरदार वकालत की है। नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट एंड इम्प्लीमेंटेशन ट्रस्ट (NICDIT) की तीसरी Apex Monitoring Authority की मीटिंग में सरकार ने साफ कर दिया है कि अब सिर्फ प्रोजेक्ट अप्रूव करने पर नहीं, बल्कि ज़मीनी स्तर पर प्रोडक्शन शुरू करवाने पर जोर दिया जाएगा।

NICDP का अपडेट: 20 नोड्स, 134 यूनिट्स तैयार

यह पहल नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट प्रोग्राम (NICDP) के तहत की जा रही है, जिसमें 13 राज्यों में 20 बड़े प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। अब तक 469 प्लॉट्स, यानी 5,348 एकड़ जमीन आवंटित की जा चुकी है। लेकिन अब असली सफलता का पैमाना इंडस्ट्रियल ऑपरेशन्स का शुरू होना है। वर्तमान में, 134 यूनिट्स प्रोडक्शन में हैं, जबकि 95 यूनिट्स निर्माणाधीन हैं। धोलेरा, शेंद्रा-बिडकिन, ग्रेटर नोएडा और विक्रम उद्योगपुरी जैसे प्रमुख नोड्स में प्रोडक्शन फेज पहले ही शुरू हो चुका है, जो आगे के डेवलपमेंट के लिए एक मॉडल का काम करेंगे।

'प्लग-एंड-प्ले' मॉडल से निवेश को बढ़ावा

इसे हकीकत बनाने के लिए सरकार 'प्लग-एंड-प्ले' इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा दे रही है। इसका मतलब है कि जमीन पर बिजली, पानी और वेस्ट मैनेजमेंट जैसी बेसिक सुविधाएं पहले से तैयार होंगी, ताकि कंपनियां अतिरिक्त इंफ्रास्ट्रक्चर का इंतजार किए बिना तुरंत अपना काम शुरू कर सकें। इस मॉडल से ₹2.21 लाख करोड़ के निवेश को आकर्षित करने का अनुमान है।

कनेक्टिविटी और भविष्य की योजनाएं

कर्नाटक में तुमकुर नोड और तेलंगाना में ज़हीराबाद इंडस्ट्रियल स्मार्ट सिटी जैसे खास प्रोजेक्ट्स की भी समीक्षा की गई, जो बड़े प्राइवेट निवेश को टारगेट कर रहे हैं। कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल ने यह भी जोर दिया कि इन कॉरिडोर्स को PM गतिशक्ति फ्रेमवर्क से जोड़ा जाना चाहिए ताकि माल की आवाजाही आसान हो और लगने वाला समय व लागत कम हो सके।

निवेशकों के लिए क्या हैं मौके और जोखिम?

निवेशकों के लिए, इस प्रोग्राम की सफलता कंस्ट्रक्शन, लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की कंपनियों के प्रदर्शन से जुड़ी है। सरकारी प्लान से फंक्शनल इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम में बदलाव उन कंपनियों को फायदा पहुंचा सकता है जो रॉ मटेरियल, स्पेशलाइज्ड कंस्ट्रक्शन सर्विसेज और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट प्रदान करती हैं।

हालांकि, कुछ जोखिम भी हैं। प्लान्ड इन्वेस्टमेंट से असल प्रोडक्शन में बदलाव मार्केट डिमांड और प्राइवेट निवेशकों के भरोसे पर काफी निर्भर करता है। साथ ही, राज्य सरकारों का कहना है कि अगर जमीन तैयार भी हो, तो मजबूत रेल या रोड कनेक्टिविटी की कमी इन इंडस्ट्रियल नोड्स को कम कॉम्पिटिटिव बना सकती है। निवेशकों को यह देखना होगा कि इंडस्ट्रियल यूनिट्स के साथ-साथ वर्कर हाउसिंग और ट्रांसपोर्ट जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर भी समय पर पूरे हो रहे हैं या नहीं, क्योंकि इनमें देरी पूरी प्रक्रिया को धीमा कर सकती है। सरकार की भविष्य की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या वे अपनी मौजूदा इन्वेंट्री को खत्म किए बिना लगातार जमीन की सप्लाई बनाए रख पाते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.