वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने देश की फैमिली-रन कंपनियों को प्रोफेशनल गवर्नेंस और सक्सेशन प्लानिंग पर ध्यान देने की सलाह दी है। इसके साथ ही उन्होंने भारत का R&D खर्च बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन (AIMA) के एक कार्यक्रम के दौरान देश के बड़े फैमिली-रन कॉरपोरेट्स को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि भारत के बड़े बिजनेस हाउस की लंबी उम्र उनकी ऑपरेशनल स्केल पर नहीं, बल्कि प्रोफेशनल लीडरशिप स्ट्रक्चर पर निर्भर करती है।
गवर्नेंस और सक्सेशन का महत्व
निवेशकों के लिए किसी कंपनी का गवर्नेंस स्ट्रक्चर रिस्क असेसमेंट का सबसे अहम हिस्सा होता है। इतिहास गवाह है कि पारिवारिक विवादों और अस्पष्ट लीडरशिप ट्रांजिशन के कारण कई बार शेयरों में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया है। वित्त मंत्री का यह बयान संकेत देता है कि जो कंपनियां सक्सेशन प्लानिंग को संस्थागत नहीं बनाएंगी, भविष्य में उन पर रेगुलेटरी सख्ती बढ़ सकती है।
'मेक इन इंडिया' से 'इमेजिंड इन इंडिया' का सफर
वित्त मंत्री ने भारत के इनोवेशन डेफिसिट पर भी चिंता जताई है। वर्तमान में भारत का ग्रॉस R&D खर्च जीडीपी का केवल 0.83% है, जबकि चीन और अमेरिका जैसे देशों में यह 2.7% से लेकर 3.5% तक है। इसमें भी प्राइवेट सेक्टर का योगदान महज 36% है। सरकार अब चाहती है कि कंपनियां केवल असेंबली न करें, बल्कि स्वदेशी डिजाइन और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) बनाने की दिशा में कदम बढ़ाएं।
निवेशकों के लिए चेकलिस्ट
शेयरधारकों के लिए अब यह जरूरी हो गया है कि वे भविष्य के निवेश के लिए कुछ बिंदुओं को ट्रैक करें:
- लीडरशिप टीम: क्या कंपनी ने सक्सेशन प्लानिंग को लेकर स्पष्ट रोडमैप दिया है?
- R&D बजट: कंपनी अपनी सालाना कमाई का कितना हिस्सा इनोवेशन पर खर्च कर रही है?
- मार्केट रीच: क्या कंपनी सिर्फ शहरी कंजम्पशन पर निर्भर है या ग्रामीण और एग्रीकल्चर सेक्टर तक पहुंच बना रही है?
आने वाले समय में उन कंपनियों के स्टॉक्स बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं, जो इन स्ट्रक्चरल बदलावों को अपने सालाना फायलिंग्स में स्पष्ट रूप से पेश करेंगी।
