Nirmala Sitharaman का India Inc को कड़ा संदेश: R&D और Governance पर दें जोर, वरना पिछड़ जाएंगे

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Nirmala Sitharaman का India Inc को कड़ा संदेश: R&D और Governance पर दें जोर, वरना पिछड़ जाएंगे

वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने भारतीय कंपनियों को रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) पर खर्च बढ़ाने की नसीहत दी है। उन्होंने साफ कहा कि भारत का **0.83%** का R&D खर्च ग्लोबल स्तर पर बहुत कम है, जिसे बढ़ाकर 'Made in India' से 'Imagined in India' की ओर बढ़ना होगा।

वित्त मंत्री ने ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन (AIMA) के प्लैटिनम जुबली कन्वेंशन में देश के भविष्य का रोडमैप पेश किया। उनका मानना है कि 2047 तक के आर्थिक लक्ष्य हासिल करने के लिए अब केवल मैन्युफैक्चरिंग ही नहीं, बल्कि इनोवेशन की जरूरत है।

R&D का बड़ा गैप

वित्त मंत्री ने आंकड़ों के जरिए बताया कि भारत का ग्रॉस R&D खर्च GDP का मात्र 0.83% है, जबकि OECD देशों का औसत 2.7% और अमेरिका का 3.5% है। चिंता की बात यह है कि इस खर्च में प्राइवेट सेक्टर की हिस्सेदारी सिर्फ 36% है। निवेशकों के लिए यह एक बड़ा संकेत है—जो कंपनियां इनोवेशन में निवेश कर रही हैं, उनकी वैल्यूएशन आने वाले समय में उन कंपनियों से बेहतर हो सकती है जो सिर्फ लागत घटाने (Cost-cutting) पर निर्भर हैं।

गवर्नेंस पर भी फोकस

सिर्फ तकनीक ही नहीं, सरकार अब कंपनियों में 'इंस्टीट्यूशनल मैच्योरिटी' (Institutional Maturity) चाहती है। खास तौर पर MSME और मिड-साइज कंपनियों को succession प्लानिंग और प्रोफेशनल मैनेजमेंट पर ध्यान देने की जरूरत है। सरकार की कोशिश है कि कंपनियां मालिक के नजरिए से नहीं, बल्कि एक प्रोफेशनल स्ट्रक्चर के साथ चलें ताकि लंबी अवधि में वे सस्टेनेबल बनी रहें।

निवेशकों के लिए सबक

निवेशक अब अपनी पसंद की कंपनियों के वार्षिक रिपोर्ट्स (Annual Reports) में R&D-टू-रेवेन्यू रेशियो पर गौर कर सकते हैं। फार्मा, ऑटो और सॉफ्टवेयर जैसे सेक्टर में वही कंपनियां टिकेंगी जो अपनी इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) तैयार कर सकेंगी। आने वाले समय में बाजार उन कंपनियों को रिवॉर्ड देगा जो क्वालिटी और गवर्नेंस के मानकों पर खरी उतरेंगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.