वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम बढ़ाते हुए API (Active Pharmaceutical Ingredients) के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने पर जोर दिया है। साथ ही, उन्होंने राज्यों को फिस्कल हेल्थ को लेकर आगाह किया और UPI ट्रांजैक्शन फीस पर स्थिति स्पष्ट की है।
API सेक्टर में आत्मनिर्भरता की तैयारी
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया है कि भारत को अब जरूरी सामानों के आयात पर निर्भरता कम करनी होगी। विशेष रूप से फार्मा सेक्टर में API का घरेलू प्रोडक्शन बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है। बीते कुछ समय में अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा और सस्ती कीमतों के कारण घरेलू कंपनियों को चुनौती मिल रही थी। सरकार अब टारगेटेड इंसेंटिव्स के जरिए इन कंपनियों को दोबारा मजबूती देने की कोशिश कर रही है, ताकि चीन जैसे देशों पर निर्भरता को खत्म किया जा सके।
राज्यों के लिए फिस्कल चेतावनी
राज्यों के बजट को लेकर वित्त मंत्री ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर राज्य अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा 'फ्रीबीज' यानी मुफ्त की योजनाओं पर खर्च करेंगे, तो इंफ्रास्ट्रक्चर, स्कूल और अस्पतालों जैसे जरूरी कैपिटल इन्वेस्टमेंट के लिए पैसा कम पड़ जाएगा। बिना सोचे-समझे किया गया यह खर्च राज्यों के फिस्कल डेफिसिट को खतरनाक स्तर तक ले जा सकता है, जो भविष्य के लिए वित्तीय दबाव का कारण बनेगा।
UPI फीस पर स्थिति स्पष्ट
डिजिटल पेमेंट्स को लेकर मार्केट में फैली कन्फ्यूजन को भी वित्त मंत्री ने दूर किया है। उन्होंने साफ कहा कि UPI पर लगने वाला 'मर्चेंट डिस्काउंट रेट' (MDR) कोई सरकारी टैक्स या सेस नहीं है, बल्कि यह मर्चेंट और सर्विस प्रोवाइडर के बीच का एक कमर्शियल समझौता है। सरकार का मकसद डिजिटल इकॉनमी को बिना किसी अतिरिक्त बोझ के आगे बढ़ाना है।
निवेशकों के लिए संकेत
फार्मा कंपनियों के लिए यह नीति एक गेम-चेंजर साबित हो सकती है। API के स्थानीय उत्पादन से कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन में सुधार की उम्मीद है। वहीं, राज्यों की फिस्कल स्थिति पर सरकार की नजर भविष्य में सरकारी बॉरोइंग और ब्याज दरों को प्रभावित कर सकती है। निवेशकों को अब उन कंपनियों पर नजर रखनी चाहिए जो मैन्युफैक्चरिंग-लिंक्ड इंसेंटिव्स का फायदा उठाने के लिए कैपेसिटी विस्तार कर रही हैं।
