केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आगामी Union Budget से पहले टैक्स पॉलिसी की समीक्षा के संकेत दिए हैं। बाजार में मची भारी उतार-चढ़ाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बीच सरकार का यह कदम काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
टैक्स पॉलिसी पर सरकार का नया रुख
मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ किया है कि सरकार आगामी Union Budget से पहले इंडस्ट्री की चिंताओं को सुनने के लिए तैयार है। हाल के दिनों में भारतीय बाजारों में Foreign Institutional Investors (FIIs) की जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली है, जिससे इंडेक्स में काफी उतार-चढ़ाव आया है। इसी को देखते हुए सरकार अब टैक्स स्ट्रक्चर, खास तौर पर Long-Term Capital Gains (LTCG) और Securities Transaction Tax (STT) पर फीडबैक लेने पर विचार कर रही है।
फिस्कल प्रूडेंस vs टैक्स राहत
सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती है। एक तरफ निवेशकों की मांग है कि मार्केट को विदेशी पूंजी के लिए और अधिक आकर्षक बनाया जाए, वहीं दूसरी तरफ सरकार का लक्ष्य 2026-27 के लिए फिस्कल डेफिसिट को 4.3% पर सीमित रखना है। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया है कि भले ही टैक्स नियमों की समीक्षा की जा रही हो, लेकिन फिस्कल अनुशासन (Fiscal Prudence) के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। यानी कोई भी राहत सरकारी खजाने और खर्चों के गणित के दायरे में ही होगी।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
विदेशी निवेशकों की निकासी ने मार्केट में दबाव बना रखा है, लेकिन सरकार का फोकस बुनियादी ढांचा (Infrastructure) पर खर्च और 7% से अधिक की जीडीपी ग्रोथ बनाए रखने पर है। सिस्टम की मजबूती के लिए सरकार ने बैंकिंग सेक्टर की अच्छी परफॉर्मेंस और मजबूत GST कलेक्शन का भी हवाला दिया है। अब नजरें बजट पूर्व होने वाली सलाह-मशविरे (Pre-budget consultations) पर टिकी हैं कि क्या सरकार टैक्स दरों में कोई बड़ा बदलाव कर ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस को सुधारने की दिशा में कोई कदम उठाती है या नहीं।
