वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने LTCG टैक्स स्ट्रक्चर की समीक्षा के संकेत दिए हैं। निवेशकों की भारी बिकवाली और 2026 में **₹3 लाख करोड़** से ज्यादा के FPI आउटफ्लो के बाद सरकार का यह रुख काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ कर दिया है कि सरकार लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स व्यवस्था पर मिल रहे सुझावों पर विचार करने के लिए तैयार है। यह बयान बजट 2027-28 की तैयारी के शुरुआती दौर में आया है, जहां सरकार घरेलू और विदेशी दोनों तरह के निवेशकों की चिंताओं को सुन रही है।\n\n### क्यों बढ़ रहा है दबाव?\n\nबीते साल 2026 में भारतीय शेयर बाजार से फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) ने ₹3 लाख करोड़ से भी अधिक की भारी बिकवाली की है। इसकी मुख्य वजहें ग्लोबल मार्केट में बढ़ती अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की अस्थिर कीमतें रही हैं। इस निकासी से बाजार में जो दबाव बना है, उसके बाद से ही टैक्स फ्रेमवर्क को प्रतिस्पर्धी बनाने की मांग तेज हो गई है।\n\n### क्या हो सकता है समाधान?\n\nSBI रिसर्च ने इस मामले पर एक अहम सुझाव दिया है। उन्होंने मौजूदा 12.5% LTCG टैक्स को पूरी तरह खत्म करने की सिफारिश की है। सुझाव यह है कि टैक्स दर घटाने के बजाय, निवेश की होल्डिंग पीरियड को 2 या 3 साल तक बढ़ाया जाए ताकि लॉन्ग टर्म निवेश को बढ़ावा मिले और स्पेक्युलेटिव ट्रेडिंग कम हो।\n\n### निवेशकों को क्या देखना चाहिए?\n\nफिलहाल सरकार ने किसी बदलाव का वादा नहीं किया है। मौजूदा टैक्स रेट जुलाई 2024 में लागू किया गया था। टैक्स नियमों में किसी भी बदलाव की संभावना का असर मार्केट की अस्थिरता पर पड़ सकता है। निवेशकों की नजर अब 1 फरवरी, 2027 को पेश होने वाले यूनियन बजट पर होनी चाहिए, जहां से सरकार की अंतिम नीति स्पष्ट होगी।
