G20 समिट के दौरान वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने अपने रूसी समकक्ष Anton Siluanov से मुलाकात की। इस हाई-प्रोफाइल मीटिंग में SCO डेवलपमेंट बैंक बनाने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई, जिसका मुख्य लक्ष्य रीजनल इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग के लिए नया फ्रेमवर्क तैयार करना है।
क्या है SCO बैंक का मकसद?
अमेरिका के ऐशविले में आयोजित G20 वित्त मंत्रियों की बैठक के दौरान यह चर्चा सुर्खियों में रही। प्रस्तावित SCO डेवलपमेंट बैंक का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच इंफ्रास्ट्रक्चर और बड़े निवेश प्रोजेक्ट्स के लिए फंडिंग का एक समर्पित जरिया बनाना है। फिलहाल, कई देश फंडिंग के लिए वैश्विक संस्थानों पर निर्भर हैं, लेकिन इस बैंक के आने से उन्हें पूंजी जुटाने का एक वैकल्पिक और मजबूत प्लेटफॉर्म मिल सकता है।
मौजूदा संस्थानों पर भी हुई चर्चा
दोनों मंत्रियों ने केवल नए बैंक की ही बात नहीं की, बल्कि New Development Bank (NDB) और Asian Infrastructure Investment Bank (AIIB) के कामकाज की समीक्षा भी की। मकसद साफ है—मौजूदा संस्थानों की कार्यक्षमता और उनकी पहुंच को कैसे और बेहतर बनाया जाए।
निवेशकों के लिए क्यों है यह जरूरी?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह एक लॉन्ग-टर्म डेवलपमेंट है। हालांकि, किसी भी नए मल्टीलेटरल वित्तीय संस्थान की नींव रखना एक जटिल और लंबी प्रक्रिया है, जिसमें सभी सदस्य देशों की सहमति और पूंजी प्रतिबद्धता (Capital Commitment) अनिवार्य है।
ग्लोबल रिस्क और चुनौतियां
वर्तमान में ग्लोबल इकोनॉमी volatile inflation और बढ़ते कर्ज के संकट से जूझ रही है। ऐसे में इस बैंक का सेटअप और ऑपरेशनल सक्सेस काफी हद तक सदस्य देशों के बीच कूटनीतिक तालमेल पर निर्भर करेगी। फिलहाल, निवेशकों को बैंक के 'फाउंडिंग डॉक्यूमेंट' और भविष्य में होने वाली औपचारिक बैठकों पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि यही तय करेंगे कि यह प्रस्ताव हकीकत में कब और कैसे बदलेगा।
