वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अमेरिका और कनाडा के दौरे पर हैं, जहाँ वे सेमीकंडक्टर, फिनटेक और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ाने पर जोर दे रही हैं। यह पहल तब हो रही है जब FPI का प्रवाह अगस्त में **₹27,186 करोड़** तक पहुंच गया है, जो साल की शुरुआत में हुए भारी बिकवाली के बाद एक बड़ी राहत है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपने 9-दिवसीय दौरे पर कनाडा और अमेरिका पहुंची हैं। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य भारत में लंबे समय के लिए विदेशी निवेश (Foreign Capital) को आकर्षित करना है। निर्मला सीतारमण ने अपने संबोधन में भारत के स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का जिक्र करते हुए सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, फिनटेक और क्रिटिकल मिनरल्स में निवेश की अपार संभावनाओं पर जोर दिया है।
FPI का बदला मूड
निवेशकों के लिए इस दौरे का समय काफी अहम है। साल 2026 की शुरुआत में भारतीय बाजार से विदेशी निवेशकों ने ₹2.3 लाख करोड़ से अधिक की निकासी की थी। हालांकि, पिछले कुछ हफ्तों से स्थिति में सुधार हुआ है। अगस्त 26, 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने ₹27,186 करोड़ का नेट निवेश किया है, जो बाजार के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
GIFT City पर दांव
वित्त मंत्री ने ग्लोबल एसेट मैनेजर्स और पेंशन फंड्स के सामने गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी (GIFT City) की खूबियों को गिनाया। सरकार का लक्ष्य इंश्योरेंस और पेंशन सेक्टर में किए गए सुधारों के जरिए इंटरनेशनल कैपिटल को भारत लाना है।
ग्लोबल रिस्क की चुनौती
सरकारी प्रयासों के बावजूद ग्लोबल मार्केट में अभी भी सावधानी का माहौल है। Bank of America के हालिया सर्वे में कुछ फंड मैनेजर्स ने भारत को लेकर सतर्क रुख अपनाया है। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, करेंसी का गिरना और अमेरिका-ईरान जैसे देशों के बीच तनावपूर्ण भू-राजनीतिक स्थिति अभी भी मार्केट के लिए बड़े रिस्क बने हुए हैं। आने वाले समय में FPI के आंकड़े और भारतीय कंपनियों की अर्निंग ग्रोथ ही यह तय करेगी कि यह निवेश की रफ्तार आगे भी बनी रहेगी या नहीं।
