वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया है कि भारतीय बाजार से विदेशी फंड की भारी निकासी की मुख्य वजह ग्लोबल स्तर पर AI सेक्टर की ओर बढ़ता निवेश है। अब तक विदेशी निवेशक **$33 बिलियन** से ज्यादा की रकम निकाल चुके हैं, जिसे देखते हुए सरकार टैक्स और IPO नियमों में बदलाव पर विचार कर रही है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय बाजारों में जारी बिकवाली के दबाव पर बड़ी बात कही है। IMF-वर्ल्ड बैंक की बैठकों के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्लोबल स्तर पर कैपिटल का एलोकेशन बदल रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के प्रति बढ़ते रुझान के कारण बड़ी मात्रा में पैसा भारत से निकलकर ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों में जा रहा है, जो AI सप्लाई चेन का बड़ा हिस्सा हैं। इस रोटेशन के कारण इस साल विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने $33 बिलियन से ज्यादा की पूंजी भारतीय बाजार से बाहर निकाली है, जो घरेलू स्थिरता के लिए एक बड़ी चुनौती है।
IPO और एग्जिट पर बढ़ती निगरानी
ग्लोबल शिफ्ट के अलावा, सरकार घरेलू लिक्विडिटी के प्रबंधन पर भी नजर रख रही है। ऑफर फॉर सेल (OFS) और IPO के जरिए बाजार से बाहर निकलने वाले पैसे पर सरकार का ध्यान है। डेटा के अनुसार, 2021 से 2025 के बीच नए लिस्टिंग के जरिए $37 बिलियन जुटाए गए, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा इनसाइडर्स के पास गया। अब सरकार इस पर चर्चा कर रही है कि क्या इनसाइडर्स के तेजी से बाहर निकलने पर अंकुश लगाया जाए, ताकि बाजार का फोकस लॉन्ग-टर्म वैल्यू क्रिएशन पर रहे।
टैक्स सुधारों पर सरकार का रुख
इन हालातों को देखते हुए, सरकार टैक्स नियमों में बदलाव की संभावनाओं को भी तलाश रही है। वित्त मंत्री ने संकेत दिए हैं कि सरकार मार्केट फीडबैक पर ध्यान दे रही है, खासकर इक्विटी टैक्सेशन को लेकर। SBI रिसर्च जैसे संस्थानों ने सुझाव दिया है कि लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स (LTCG) के बेनिफिट्स को निवेश की लंबी अवधि से जोड़ दिया जाए। हालांकि अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है, लेकिन सुधारों को लेकर सरकार की तत्परता यह दिखाती है कि वे विदेशी फंड पर निर्भरता कम करके घरेलू निवेशकों को प्रोत्साहित करना चाहते हैं।
