नई दिल्ली में आयोजित 'कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव' में वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को रेखांकित किया। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में भारत की GDP ग्रोथ **7.8%** रही है, जबकि सरकार अपने कर्ज के स्तर को कम करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।
आर्थिक मजबूती और राजकोषीय लक्ष्य
कॉन्क्लेव के दौरान वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत ने हालिया भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद महंगाई और सप्लाई चेन के संकट से खुद को बचाए रखा है। भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट GDP का मात्र 0.5% है और फॉरेक्स रिजर्व लगभग $766 बिलियन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है। सरकार का लक्ष्य चालू वित्त वर्ष के लिए फिस्कल डेफिसिट को 4.3% पर सीमित रखना है।
कर्ज में गिरावट का रास्ता
इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) के अनुसार, साल 2029 तक वैश्विक कर्ज GDP का 100% तक पहुंच सकता है, लेकिन भारत की स्थिति इसके उलट है। सरकार का अनुमान है कि भारत का सामान्य सरकारी कर्ज वित्त वर्ष 2026 के 83.4% से गिरकर साल 2030-31 तक 77.7% पर आ जाएगा।
सुधार और बैंकिंग सेक्टर के लिए चेतावनी
सीतारमण ने इस सफलता का श्रेय 2014 से शुरू किए गए स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स को दिया, जिनमें जन धन-आधार-मोबाइल ट्रिनिटी और आयुष्मान भारत जैसे प्रमुख कार्यक्रम शामिल हैं।
हालाँकि, इस मजबूती के बीच Reserve Bank of India ने वित्तीय संस्थानों को सतर्क किया है। RBI ने कहा कि स्थिरता के लंबे दौर में बैंक अक्सर लापरवाह हो जाते हैं और जोखिम लेने लगते हैं। केंद्रीय बैंक ने बैंकों को अनुशासन बनाए रखने की सख्त सलाह दी है ताकि भविष्य में कोई बड़ी दिक्कत न आए।
