वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बाजार में हालिया उतार-चढ़ाव पर अपनी राय रखी है। उनका मानना है कि बाजार में 'एक्सेस लिक्विडिटी' (Excess Liquidity) यानी पूंजी की आसान उपलब्धता के कारण मार्केट में तेजी से पैसा आ रहा है और बाहर निकल रहा है, जो वोलेटिलिटी की मुख्य वजह है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ किया है कि भारतीय इक्विटी मार्केट में मौजूदा उठापटक के पीछे कोई बुनियादी कमजोरी नहीं, बल्कि बाजार में मौजूद 'एक्सेस लिक्विडिटी' एक बड़ा कारण है। सरकार के नजरिए से, पूंजी का बाजार में बहुत आसानी से आना और जाना एक 'दोधारी तलवार' की तरह काम कर रहा है।
पूंजी की रफ्तार और मार्केट पर असर
आज के समय में मार्केट एक्सेसिबिलिटी काफी बढ़ गई है। निवेशक अब बिना किसी बाधा के अपनी पोजीशन बदल रहे हैं, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव (Volatility) की रफ्तार पहले के मुकाबले काफी तेज हो गई है। जब अनिश्चितता का माहौल होता है, तो इसी आसान लिक्विडिटी के कारण सेलिंग प्रेशर (Selling Pressure) अचानक बढ़ जाता है, जिससे इंडेक्स में भारी गिरावट दिखाई देती है, जबकि कंपनियों का परफॉरमेंस जस का तस रहता है।
अर्थव्यवस्था की सेहत पर क्या बोलीं वित्त मंत्री?
वित्त मंत्री ने जोर देकर कहा कि बाजार का सेंटीमेंट और भारतीय अर्थव्यवस्था की वास्तविक सेहत के बीच एक बड़ा अंतर है। उन्होंने बताया कि भारत के मैक्रोइकोनॉमिक इंडिकेटर्स (जैसे इकोनॉमिक ग्रोथ और इंफ्रास्ट्रक्चर स्पेंडिंग) बेहद मजबूत हैं। हालिया गिरावट किसी आर्थिक कमजोरी का संकेत नहीं, बल्कि लिक्विडिटी मैनेजमेंट का एक स्ट्रक्चरल आउटकम है।
रिटेल निवेशकों के लिए क्या है सीख?
रिटेल निवेशकों को यह समझना होगा कि जब लिक्विडिटी बहुत अधिक होती है, तो वैल्यूएशन अक्सर मुनाफे से तेज भागते हैं। ऐसे में जब बाजार का मिजाज बदलता है, तो करेक्शन भी उतनी ही तेजी से होता है। फिलहाल मार्केट FIIs (Foreign Institutional Investors) के बड़े और तेज मूवमेंट से प्रभावित हो रहा है। ऐसे में निवेशकों को RBI के लिक्विडिटी मैनेजमेंट रुख पर नजर बनाए रखनी चाहिए, क्योंकि बाजार की स्थिरता भविष्य में इस पूंजी प्रवाह की गति पर ही निर्भर करेगी।
