श्रीलंका के पूर्व वित्त मंत्री अली साबरी ने खुलासा किया है कि देश को 2022 के आर्थिक संकट से निकालने में भारत की वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman की भूमिका निर्णायक रही। भारत की **$4 बिलियन** की आपातकालीन मदद और कूटनीतिक कोशिशों ने श्रीलंका को डूबने से बचाया।
2022 में जब श्रीलंका का आर्थिक ढांचा पूरी तरह चरमरा गया था, तब विदेशी मुद्रा भंडार खत्म होने और कर्ज चुकाने में असमर्थता ने देश को तबाही की कगार पर खड़ा कर दिया था। अब श्रीलंका के पूर्व वित्त मंत्री अली साबरी ने इस संकट के समय भारत की भूमिका पर बड़ा खुलासा किया है।
कूटनीति का असर
सबरी के अनुसार, शुरुआती दौर में IMF श्रीलंका को लेकर काफी सशंकित था, क्योंकि पहले के प्रोग्राम्स फेल हो चुके थे। लेकिन वॉशिंगटन डीसी में IMF-वर्ल्ड बैंक की स्प्रिंग मीटिंग्स के दौरान, निर्मला सीतारमण ने IMF मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिस्टालिना जॉर्जीवा के साथ श्रीलंका के पक्ष में मजबूती से पैरवी की। इस हाई-लेवल दखल के बाद ही बातचीत का रुख पूरी तरह बदल गया और बेलआउट की राह आसान हुई।
भारत बना असली 'लाइफलाइन'
भारत ने केवल कूटनीतिक समर्थन ही नहीं दिया, बल्कि आर्थिक रूप से भी बड़ी भूमिका निभाई:
- $4 बिलियन की क्रेडिट लाइन: फरवरी से मार्च 2022 के बीच ईंधन, दवा और भोजन जैसी जरूरी चीजों के लिए यह मदद दी गई।
- रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI): करेंसी स्वैप के जरिए श्रीलंका के सेंट्रल बैंक में लिक्विडिटी बढ़ाई गई।
- कर्ज में राहत: एशियाई क्लियरिंग यूनियन के तहत भारत ने अरबों के बकाया को टाल दिया।
मार्च 2023 में भारत पहला द्विपक्षीय लेनदार बना जिसने IMF की शर्तों को पूरा करने के लिए जरूरी लिखित आश्वासन दिए, जिससे $3 बिलियन का 'एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी' प्रोग्राम शुरू हो सका। यह कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के एक जिम्मेदार आर्थिक भागीदार के रूप में उभरने का प्रमाण है, हालांकि श्रीलंका के सामने अभी भी कर्ज की स्थिरता और घरेलू सुधारों जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं।
