FM Nirmala Sitharaman का कंपनियों को कड़ा संदेश: 'फाउंडर-लेड' मॉडल छोड़ प्रोफेशनल बनें

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorAditya Rao|Published at:
FM Nirmala Sitharaman का कंपनियों को कड़ा संदेश: 'फाउंडर-लेड' मॉडल छोड़ प्रोफेशनल बनें

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय कंपनियों को संस्थापक-संचालित (founder-led) मॉडल से हटकर प्रोफेशनल इंस्टीट्यूशंस में बदलने की सलाह दी है। भारत की **8%** की जीडीपी ग्रोथ को देखते हुए यह बदलाव लॉन्ग-टर्म स्थिरता और बेहतर गवर्नेंस के लिए बेहद जरूरी है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में एक इंडस्ट्री इवेंट के दौरान भारतीय प्राइवेट सेक्टर के लिए भविष्य का खाका खींचा है। उन्होंने साफ कहा कि भारत की 8% की इकोनॉमिक ग्रोथ रेट, जो वैश्विक औसत 3% से कहीं ज्यादा है, को बनाए रखने के लिए कंपनियों को अपनी आंतरिक कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव करना होगा।

निवेशकों के लिए क्यों जरूरी है 'प्रोफेशनलाइजेशन'?

निवेशकों के लिए किसी कंपनी का मैनेजमेंट स्ट्रक्चर जोखिम को समझने का सबसे अहम पैमाना है। भारत में कई फैमिली-ओन्ड बिजनेस काफी सफल हैं, लेकिन वे अक्सर 'की-मैन रिस्क' (key-man risk) से जूझते हैं। इसका मतलब है कि कंपनी की पूरी रणनीति और सफलता एक ही व्यक्ति या परिवार पर निर्भर है। यदि उस व्यक्ति के साथ कोई स्वास्थ्य समस्या या उत्तराधिकार विवाद होता है, तो कंपनी का प्रदर्शन सीधे तौर पर प्रभावित होता है। प्रोफेशनल मैनेजमेंट सिस्टम और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स से कंपनी का संचालन अधिक पारदर्शी होता है, जिससे शेयरहोल्डर का भरोसा बढ़ता है।

कानूनी और रेगुलेटरी विवादों से बचने की सलाह

वित्त मंत्री ने कंपनियों को यह भी नसीहत दी कि वे रेगुलेटरी विवादों में तुरंत लिटिगेशन (litigation) या कोर्ट का रास्ता न अपनाएं। लंबे समय तक चलने वाली कानूनी लड़ाइयां कंपनी के स्टॉक पर बुरा असर डालती हैं और मैनेजमेंट का ध्यान मुख्य बिजनेस से हटा देती हैं। इसके बजाय, संवाद और सहयोग से समस्याओं को सुलझाना एक मैच्योर कॉर्पोरेट कल्चर की पहचान है। जो कंपनियां विवादों को कोर्ट के बाहर सुलझाती हैं, वे निवेशकों की नजर में अधिक स्थिर मानी जाती हैं।

निवेशकों को क्या देखना चाहिए?

अब समय आ गया है कि निवेशक अपने पोर्टफोलियो की कंपनियों में कुछ खास संकेतों पर नजर रखें:

  • बोर्ड में इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स की सक्रिय भूमिका।
  • नेतृत्व के लिए स्पष्ट उत्तराधिकार योजना (succession planning)।
  • विवादों को सुलझाने का शांतिपूर्ण और कानूनी दांव-पेंच से मुक्त तरीका।

संस्थापक का जोश शुरुआती दौर के लिए तो ठीक है, लेकिन बड़ी कॉर्पोरेट सफलता के लिए प्रोफेशनल मैनेजमेंट ही लंबे समय तक टिके रहने का मंत्र है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.