वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ कर दिया है कि UPI पर **₹2,000** से ज्यादा के ट्रांजेक्शन पर **0.4%** का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) ग्राहकों को नहीं, बल्कि दुकानदारों को चुकाना होगा।
नियम और शर्तें
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह 0.4% का शुल्क केवल उन पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) ट्रांजेक्शन पर लागू होगा जो ₹2,000 की सीमा से अधिक हैं। छोटे व्यापारियों को इस दायरे से बाहर रखा गया है, विशेष रूप से वे दुकानदार जिनका मासिक कलेक्शन ₹1 लाख से कम है। इसके अलावा, ₹75,000 से अधिक के बड़े ट्रांजेक्शन के लिए फीस को अधिकतम ₹300 पर सीमित कर दिया गया है, ताकि बड़े व्यापारिक लेन-देन में पारदर्शिता बनी रहे।
सरकार की रणनीति
वित्त मंत्रालय ने इसे किसी प्रकार का टैक्स या सेस नहीं, बल्कि डिजिटल पेमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर के मेंटेनेंस का खर्च बताया है। ठीक वैसे ही, जैसे कार्ड पेमेंट प्लेटफॉर्म (Visa, Mastercard) के लिए मर्चेंट शुल्क देते आए हैं। Indian Banks Association के साथ मिलकर सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि दुकानदार इस लागत को ग्राहकों पर न डालें।
GST का पेंच बाकी
हालांकि MDR का ढांचा अब साफ है, लेकिन इस फीस पर 18% GST लगने की संभावना पर अभी भी सस्पेंस बरकरार है। GST काउंसिल इस पर आगामी बैठकों में फैसला लेगी। फिलहाल सरकारी अधिकारी इस मामले में थोड़ी नरमी बरतने के संकेत दे रहे हैं, ताकि व्यापारियों पर वित्तीय बोझ बहुत अधिक न बढ़े।
