5 अगस्त को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयरों में **₹943.42 करोड़** की बिकवाली की। इस दो दिन की खरीदारी के बाद, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने **₹2,883.17 करोड़** की खरीदारी कर बाजार को सहारा दिया। निफ्टी 50 फिलहाल **24,624** के करीब कारोबार कर रहा है।
विदेशी निवेशकों का पैसा निकला, देसी लौटे!
5 अगस्त, 2026 को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय इक्विटी में ₹943.42 करोड़ की शुद्ध बिकवाली की। यह उस छोटी सी दो-दिवसीय अवधि को बाधित करता है जब विदेशी पैसा बाजार में वापस आ रहा था। हालाँकि, बिकवाली के दबाव का सामना घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) से मजबूत खरीदारी समर्थन से हुआ, जिन्होंने ₹2,883.17 करोड़ का शुद्ध निवेश किया।
घरेलू निवेश की बढ़ती ताकत
यह परिदृश्य, जहां घरेलू खरीदारी विदेशी बिकवाली को संतुलित करती है, इस साल एक आम बात बन गई है। साल-दर-तारीख के आंकड़े बताते हैं कि जहाँ FIIs ने लगभग ₹3.40 लाख करोड़ निकाले हैं, वहीं DIIs लगातार ₹4.94 लाख करोड़ का निवेश कर बाजार को सहारा दे रहे हैं। यह बदलाव बताता है कि भारतीय खुदरा और संस्थागत भागीदारी एक महत्वपूर्ण सहारा प्रदान कर रही है।
बाजार का हाल
सेंसेक्स और निफ्टी 50 जैसे प्रमुख सूचकांक 24,624 के स्तर के आसपास मामूली बढ़त के साथ बंद हुए, जो समेकन का दौर दर्शाते हैं। वहीं, निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में क्रमशः 0.2% और 0.7% की मामूली बढ़त दर्ज की गई। ऑटोमोबाइल, मेटल और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में खास दिलचस्पी देखी गई।
आगे क्या?
कच्चे तेल की कीमतें $80.5 प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं, जो महंगाई के दृष्टिकोण के लिए महत्वपूर्ण है। साथ ही, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रेपो रेट 5.5% पर बरकरार रखा है, जिससे स्थिर ब्याज दर का माहौल बना हुआ है।
इन स्थिर मैक्रोइकॉनॉमिक कारकों के बावजूद, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक व्यापार अनिश्चितताएं निवेशकों को सतर्क कर रही हैं। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि कंपनियों की कमाई वृद्धि और मौजूदा बाजार मूल्यांकन के बीच अंतर एक मध्यम अवधि का जोखिम पैदा कर सकता है। जैसे-जैसे जून तिमाही के नतीजे आ रहे हैं, निवेशक इस बात पर ध्यान देंगे कि क्या कॉर्पोरेट लाभ मौजूदा P/E अनुपात को सही ठहरा सकते हैं।
