10 अगस्त 2026 को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय इक्विटीज़ में ₹1,975 करोड़ की शुद्ध खरीदारी की। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने ₹1,290 करोड़ के शेयर बेचकर बिकवाली का रुख अपनाया।
संस्थागत निवेशकों की चाल में बदलाव
10 अगस्त 2026 को भारतीय शेयर बाज़ारों में संस्थागत निवेशकों की भागीदारी में एक अहम बदलाव देखा गया। जहाँ विदेशी निवेशकों ने अपनी सक्रियता बढ़ाई, वहीं घरेलू निवेशकों ने बिकवाली की। एक्सचेंज के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने ₹1,975 करोड़ की शुद्ध खरीदारी की। इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने ₹1,290 करोड़ की बिकवाली की, जिससे बाज़ार से पैसा निकाला गया।
यह लगातार दूसरा सत्र है जब FIIs ने शुद्ध खरीदारी की है। इस ट्रेडिंग सत्र में FIIs ने कुल ₹13,162 करोड़ के शेयर खरीदे और ₹11,187 करोड़ के बेचे। दूसरी ओर, DIIs ने ₹15,869 करोड़ के शेयर खरीदे थे, लेकिन ₹17,159 करोड़ बेच दिए, जो दर्शाता है कि घरेलू फंडों ने अपनी होल्डिंग्स कम की हैं।
साल 2026 के अब तक के रुझान
साल 2026 में अब तक के संस्थागत प्रवाह में विदेशी और घरेलू निवेशकों के बीच एक बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है। इस पूरे साल FIIs लगातार बिकवाली करते रहे हैं, जिनकी कुल बिकवाली लगभग ₹3.38 लाख करोड़ आंकी गई है। विदेशी बिकवाली को थामने में घरेलू निवेशकों ने अहम भूमिका निभाई है, जिन्होंने साल-दर-तारीख करीब ₹4.96 लाख करोड़ की शुद्ध खरीदारी की है। DIIs की यह खरीदारी विदेशी बिकवाली को सोखने का काम करती रही है, जो बाज़ार में अधिक गिरावट को रोकने में महत्वपूर्ण रही है।
बाज़ार में स्थिरता और सेक्टर पर असर
मुख्य सूचकांकों में सीमित हलचल देखी गई। निफ्टी 50 में 0.05% की मामूली बढ़त के साथ यह 24,583 पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स 0.06% चढ़कर 78,542 पर पहुंच गया। बाज़ार एक संकीर्ण दायरे में कंसोलिडेट (Consolidate) कर रहा है, निफ्टी 24,430 और 24,700 के बीच कारोबार कर रहा है। हालाँकि प्रमुख सूचकांकों में शांति थी, लेकिन ब्रॉडर मार्केट (Broader Market) में लचीलापन दिखा, जहाँ निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.62% की बढ़त दर्ज की गई। वहीं, निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 0.27% की गिरावट आई।
10 अगस्त को सेक्टर परफॉरमेंस (Sector Performance) में मिली-जुली तस्वीर दिखी। रियल एस्टेट, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और प्राइवेट बैंकों जैसे सेक्टरों में खरीदारी देखी गई। दूसरी ओर, पब्लिक सेक्टर बैंक, इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑयल एंड गैस शेयरों में गिरावट आई।
निगरानी में रखे जाने वाले जोखिम
निवेशक वर्तमान में बाहरी कारकों पर नजर रख रहे हैं जो लिक्विडिटी (Liquidity) और बाज़ार की स्थिरता को प्रभावित कर सकते हैं। ब्रेंट क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतें, जो करीब $85 प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं, भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय हैं क्योंकि इनका महंगाई और आयात बिल पर असर पड़ सकता है। इसके अतिरिक्त, बाज़ार वैश्विक संकेतों के प्रति संवेदनशील बना हुआ है, जिसमें अमेरिकी लेबर मार्केट के अपडेट और फेडरल रिजर्व की नीतिगत उम्मीदें शामिल हैं, जो FIIs के व्यवहार को प्रभावित कर रही हैं। FIIs की यह खरीदारी जारी रहेगी या नहीं, यह वैश्विक ब्याज दरों की उम्मीदों और भारतीय रुपये की स्थिरता पर निर्भर करेगा।
