विदेशी निवेशक अब भारतीय इक्विटीज़ पर फिर से विचार कर रहे हैं, क्योंकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित ग्लोबल बाज़ारों में आई तूफानी तेज़ी अब थोड़ी धीमी पड़ती दिख रही है। विश्लेषकों का मानना है कि ग्लोबल कैपिटल, साउथ कोरिया और ताइवान जैसे टेक-केंद्रित बाज़ारों से निकलकर भारत के स्थिर आर्थिक माहौल की ओर मुड़ सकता है। हाल ही में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की खरीदारी में तेज़ी लौटना, इस बढ़ती दिलचस्पी का संकेत दे रहा है।
ग्लोबल इन्वेस्टर्स का बदलता नज़रिया
जो ग्लोबल निवेशक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर केंद्रित बाज़ारों में भारी भरकम पैसा लगा रहे थे, वे अब भारत को नए निवेश के लिए एक आकर्षक गंतव्य के रूप में देख रहे हैं। पिछले एक साल से, अमेरिका, ताइवान और साउथ कोरिया जैसे टेक-भारी देशों में AI बूम के कारण बड़ी उछाल देखी गई थी। इस वजह से भारतीय इक्विटीज़, देश की स्थिर आर्थिक स्थिति के बावजूद, थोड़ी पीछे रह गई थी।
क्यों पिछड़ा भारतीय बाज़ार?
Abakkus Investment Managers जैसे वित्तीय विश्लेषकों का कहना है कि भारतीय स्टॉक्स के हालिया अंडरपरफॉर्मेंस का मुख्य कारण ग्लोबल कैपिटल का रोटेशन था, न कि देश की कंपनियों के प्रदर्शन में गिरावट। जैसे-जैसे निवेशक AI की वजह से तेज़ी से बढ़े बाज़ारों से मुनाफा वसूल रहे हैं, वे अब भारत के लॉन्ग-टर्म स्ट्रक्चरल ड्राइवर्स जैसे कि जनसांख्यिकी, स्थिर खपत और लगातार इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च पर ध्यान दे रहे हैं।
जून 2026 तक के बारह महीनों में प्रदर्शन के अंतर को देखें तो समझ आता है कि ग्लोबल पैसा भारत से क्यों दूर गया। इस दौरान, Nifty 50 टोटल रिटर्न इंडेक्स लगभग 0.4% की गिरावट के साथ सपाट रहा। इसके विपरीत, अंतर्राष्ट्रीय सूचकांकों ने बड़ी छलांग लगाई, जिसमें साउथ कोरियाई Kospi 103.2%, ताइवान का Taiex 83.2%, जापानी Nikkei 56.7%, और Nasdaq 20.1% बढ़ा।
ताज़ा रुझान और FIIs की भूमिका
हालांकि, यह ट्रेंड अब बदलने लगा है। जहाँ टेक-केंद्रित सूचकांकों में अस्थिरता देखी जा रही है, वहीं भारत में मजबूती के संकेत मिल रहे हैं। जुलाई 2026 के आंकड़े बताते हैं कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय इक्विटीज़ में शुद्ध खरीदार के तौर पर वापसी की है, जिन्होंने लगभग ₹20,199 करोड़ की खरीदारी की। यह दर्शाता है कि चर्चा अब AI-संचालित टेक ग्रोथ से हटकर स्थिर, विविध बाज़ारों की तलाश की ओर बढ़ रही है।
भारत की अनूठी स्थिति और जोखिम
भारत की मौजूदा बाज़ार स्थिति का एक अनूठा पहलू यह है कि यह AI हार्डवेयर और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग बूम से सीधे तौर पर जुड़ा नहीं है। जहाँ इसने भारतीय स्टॉक्स को AI-आधारित रैली से चूकने का कारण बनाया, वहीं इसने बाज़ार को उन वैल्यूएशन बबल और अस्थिरता से भी बचाया है जो अब टेक-केंद्रित क्षेत्रों को प्रभावित कर रहे हैं। कुछ ग्लोबल निवेशकों के लिए, यह भारत को एक डिफेंसिव हेज या टैक्टिकल ट्रेड बनाता है, न कि कोर AI बेट।
निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि इस बदलाव में जोखिम भी शामिल हैं। भारतीय बाज़ार ग्लोबल फैक्टरों के प्रति संवेदनशील बना हुआ है, जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका की ब्याज दरों में संभावित बदलाव, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव शामिल हैं। इसके अलावा, विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के लिए भारतीय मूल्यांकन स्तरों को कॉर्पोरेट आय में निरंतर वृद्धि का समर्थन मिलना चाहिए। इस पूंजी प्रवाह की स्थिरता इस बात पर निर्भर करेगी कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था कैसा प्रदर्शन करती है और क्या विदेशी संस्थागत निवेशकों की वर्तमान रुचि लंबी अवधि की प्रतिबद्धता में बदल पाती है।
