FIIs की वापसी! भारतीय इक्विटी में ₹1,594 करोड़ का निवेश, बाजार में दिखी तेजी

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorMehul Desai|Published at:
FIIs की वापसी! भारतीय इक्विटी में ₹1,594 करोड़ का निवेश, बाजार में दिखी तेजी

25 अगस्त, 2026 को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयर बाजार में ₹1,594 करोड़ का निवेश कर शुद्ध खरीदार बने। इस बीच, निफ्टी 50 में **0.48%** की बढ़त देखी गई, जबकि निफ्टी मिडकैप 100 एक नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। हालांकि, साल-दर-तारीख (YTD) आधार पर FIIs अभी भी बिकवाली के मूड में हैं, जो लंबी अवधि के लिए सावधानी का संकेत देता है।

FIIs का बाज़ार में लौटना

25 अगस्त, 2026 को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयर बाजार में ₹1,594 करोड़ का निवेश किया। यह कदम ऐसे दिन बाजार को सहारा देने में मददगार साबित हुआ, जो आम तौर पर मंथली एक्सपायरी (Monthly Expiry) के कारण ज्यादा उतार-चढ़ाव वाला रहता है। इस दौरान, निफ्टी 50 115 अंक यानी 0.48% चढ़कर 24,334 पर बंद हुआ, वहीं सेंसेक्स 286 अंक या 0.37% की मजबूती के साथ 77,656 पर रुका।

मिडकैप सेगमेंट में दमदार प्रदर्शन

जहां एक ओर प्रमुख इंडेक्स (Benchmark Indices) ने ट्रेडिंग के आखिरी घंटे में रिकवरी दिखाई, वहीं असली मजबूती मिडकैप सेगमेंट में देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स सत्र के दौरान 0.54% की बढ़त के साथ अपने नए ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गया। यह दर्शाता है कि निवेशक अभी भी मध्यम आकार की कंपनियों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जिनमें विदेशी बिकवाली के दबाव के बावजूद मजबूती बनी हुई है।

साल-दर-तारीख (YTD) का आंकलन

FIIs की इस दिन की वापसी एक महत्वपूर्ण बदलाव है, लेकिन इसे साल-दर-तारीख (Year-to-Date) के बड़े परिप्रेक्ष्य में देखना जरूरी है। अगस्त में अब तक FIIs ने लगभग ₹8,757 करोड़ का निवेश किया है, लेकिन वे 2026 के लिए नेट सेलर्स बने हुए हैं, जिनका कुल बहिर्वाह (Outflows) लगभग ₹3.38 लाख करोड़ है। इसकी तुलना में, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने इस साल बाजार को सहारा देने में मुख्य भूमिका निभाई है, और साल-दर-तारीख ₹4.98 लाख करोड़ से अधिक की शुद्ध खरीदारी की है।

आगे की राह और जोखिम

निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि 25 अगस्त की बाजार की तेजी मंथली एक्सपायरी के साथ मेल खाती है, जब व्यापारी अक्सर अपने अनुबंधों को बंद करते हैं, जिससे कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव आता है। आगे चलकर, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता बाजार के लिए एक प्रमुख जोखिम कारक बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय टेक कंपनियों की कमाई और भू-राजनीतिक बदलाव (Geopolitical Shifts) जैसी घटनाएं विदेशी निवेशकों के भारतीय इक्विटी की ओर रुख को प्रभावित करती रहेंगी। बाजार की स्थिरता पर नजर रखने की कुंजी यह देखना होगा कि क्या FIIs आने वाले सत्रों में अपनी इस खरीदारी की गति को बनाए रख पाते हैं, क्योंकि इस साल उनका समग्र रुख भारतीय शेयरों में अपनी हिस्सेदारी कम करने का रहा है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.