विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने Nifty 50 में अपनी मंदी की पोजीशन को बढ़ाकर **2.47 लाख** कॉन्ट्रैक्ट्स कर दिया है। इनका **1:10** का लॉन्ग-शॉर्ट रेशियो संकेत दे रहा है कि बाजार में किसी भी तेजी के दौरान भारी बिकवाली का सामना करना पड़ सकता है।
सितंबर सीरीज में सतर्कता का माहौल
Nifty 50 ने सितंबर डेरिवेटिव्स सीरीज की शुरुआत काफी संभलकर की है। 1 सितंबर 2026 तक के डेटा के अनुसार, FIIs ने 2.47 लाख शॉर्ट कॉन्ट्रैक्ट्स जमा कर लिए हैं, जो अगस्त सीरीज के अंत में 2.08 लाख थे।
क्यों चिंता का विषय है 1:10 का रेशियो?
शेयर बाजार में 'शॉर्ट' का मतलब है बाजार के गिरने पर दांव लगाना। मौजूदा 1:10 के लॉन्ग-शॉर्ट रेशियो का मतलब है कि बाजार में हर एक तेजी के सौदे के मुकाबले 10 सौदे मंदी के हैं। यह भारी असंतुलन एक 'ओवरहेंग' की तरह काम कर रहा है। इसका सीधा सा मतलब है कि जब भी निफ्टी ऊपर जाने की कोशिश करेगा, ये शॉर्ट्स एक रेजिस्टेंस के तौर पर खड़े होंगे और निवेशक बढ़त मिलते ही मुनाफावसूली या बिकवाली करेंगे।
बड़ा बिकवाली का आंकड़ा
सितंबर सीरीज की शुरुआत से ही FIIs इंडेक्स फ्यूचर्स में नेट सेलर बने हुए हैं। उन्होंने अब तक कुल ₹5,968.16 करोड़ के कॉन्ट्रैक्ट्स बेचे हैं, जो इंडेक्स की मौजूदा कमजोरी की मुख्य वजह है।
अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल्स
टेक्निकल तौर पर बाजार अभी दो महत्वपूर्ण लेवल्स के बीच फंसा है:
- सपोर्ट: 23,700 का स्तर तत्काल सपोर्ट का काम कर रहा है। अगर इंडेक्स इसे नहीं थाम पाया, तो और बिकवाली देखने को मिल सकती है।
- रेजिस्टेंस: 24,333 का लेवल एक मजबूत ऊपरी रुकावट है। इस स्तर के ऊपर टिकने के बाद ही बाजार में मंदी का असर कम माना जाएगा।
