ग्लोबल वॉचडॉग Financial Action Task Force (FATF) ने क्रिप्टो एसेट्स और स्कैम नेटवर्क को नियंत्रित करने के लिए बड़ी पहल की है। 2027 से क्रिप्टो सर्विस प्रोवाइडर्स की कड़ी समीक्षा की जाएगी, जिसका सीधा असर भारत समेत सभी सदस्य देशों पर पड़ेगा।
मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग पर नजर रखने वाली ग्लोबल संस्था FATF ने पेरिस में हुई हालिया बैठक में डिजिटल फाइनेंशियल क्राइम पर लगाम कसने का फैसला किया है। संस्था अब वर्चुअल एसेट्स के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए रेगुलेटरी गैप्स को बंद करने पर जोर दे रही है। यूके (UK) के नेतृत्व में, FATF ने 2027 से क्रिप्टो सर्विस प्रोवाइडर्स की टारगेटेड समीक्षा करने का ऐलान किया है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी डिजिटल प्लेटफॉर्म मनी लॉन्ड्रिंग का जरिया न बन सके।\n\n### स्कैम नेटवर्क्स पर एक्शन\nक्रिप्टो के अलावा, FATF अब ऑर्गेनाइज्ड क्राइम नेटवर्क्स और स्कैम सेंटर्स के खिलाफ भी आक्रामक रुख अपना रही है। संस्था ने सदस्य देशों से कहा है कि वे केवल निगरानी न करें, बल्कि इन क्रिमिनल ऑपरेशंस की फंडिंग चेन को पूरी तरह से बाधित करें।\n\n### वॉचलिस्ट में बदलाव\nलेटेस्ट प्लनरी में बुल्गारिया, कोटे डी आइवर, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और मोनाको को 'इंक्रीज्ड मॉनिटरिंग' लिस्ट से बाहर कर दिया गया है। वहीं, वियतनाम की धीमी प्रगति पर चिंता जताई गई है। इसके अलावा म्यांमार, ईरान और रूस को लेकर संस्था का रुख अभी भी सख्त बना हुआ है।\n\n### भारत के लिए संकेत\nभारत FATF का सक्रिय सदस्य है और अपने एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग (AML) फ्रेमवर्क को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप रखता है। भारत में वर्चुअल एसेट सर्विस प्रोवाइडर्स पहले से ही PMLA एक्ट के दायरे में हैं। जानकारों का मानना है कि 2027 तक नियमों के और सख्त होने की संभावना है, जिससे क्रिप्टो और फिनटेक स्पेस में ट्रांसपेरेंसी और क्रॉस-बॉर्डर फ्लो मॉनिटरिंग पर फोकस और बढ़ेगा।
