सरकार ने Foreign Assets of Small Taxpayers-Disclosure Scheme (FAST-DS) लॉन्च की है। इसके जरिए करदाता अपनी अघोषित विदेशी संपत्ति का खुलासा **31 दिसंबर 2026** तक कर सकते हैं और Black Money Act के भारी पेनल्टी से बच सकते हैं।
सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) ने FAST-DS स्कीम की शुरुआत की है। यह एक स्वैच्छिक अनुपालन (voluntary compliance) विंडो है, जिसका मकसद उन करदाताओं को राहत देना है जिन्होंने अपनी विदेशी संपत्तियों की जानकारी पहले नहीं दी थी। अगस्त 2026 से शुरू हुई यह स्कीम 31 दिसंबर 2026 तक खुली रहेगी।
डिस्क्लोजर के दो रास्ते
स्कीम में गलती की प्रकृति के आधार पर दो विकल्प दिए गए हैं:
- टेक्निकल नॉन-रिपोर्टिंग: अगर संपत्ति का सोर्स वैध है लेकिन आपने 'Schedule FA' में इसे नहीं दिखाया, तो ₹5 करोड़ तक की संपत्ति के लिए आपको सिर्फ ₹1 लाख की फ्लैट फीस भरनी होगी।
- अघोषित विदेशी आय: अगर संपत्ति या आय अघोषित है और इसकी वैल्यू ₹1 करोड़ तक है, तो आपको 31 मार्च 2026 की फेयर मार्केट वैल्यू पर 60% टैक्स का भुगतान करना होगा।
ग्लोबल डेटा से बढ़ी निगरानी
CRS (Common Reporting Standard) और FATCA जैसे ग्लोबल फ्रेमवर्क्स के कारण अब भारतीय टैक्स अथॉरिटीज के पास आपके विदेशी बैंक खातों, ESOPs और पेंशन फंड्स का रियल-टाइम डेटा मौजूद है। यह स्कीम उन लोगों के लिए एक मौका है जो अनजाने में हुई गलतियों को सुधारना चाहते हैं।
महत्वपूर्ण सावधानियां
यह स्कीम सभी के लिए नहीं है। जिन लोगों के खिलाफ पहले से ही Black Money Act के तहत कार्यवाही शुरू हो चुकी है, वे इसका लाभ नहीं ले पाएंगे। इसके अलावा, PMLA (Prevention of Money-laundering Act) के दायरे में आने वाली संपत्ति के लिए भी यह स्कीम लागू नहीं होगी। ध्यान रहे, गलत कैटेगरी में फाइलिंग करने पर इम्युनिटी खत्म हो सकती है और भारी पेनल्टी लग सकती है।
