Flipkart के पुराने सीनियर अधिकारियों ने पैरेंट कंपनी Walmart को पत्र लिखकर अपने एम्प्लॉई स्टॉक ऑप्शंस (ESOPs) को वापस खरीदने की अपील की है। जुलाई 2026 में हुए बायबैक में केवल मौजूदा कर्मचारियों को मौका मिलने के बाद, अब पुराने दिग्गज भी एग्जिट का रास्ता तलाश रहे हैं।
फ्लिपकार्ट के शुरुआती दौर में कंपनी को खड़ा करने वाले दिग्गजों ने अब पैरेंट कंपनी वॉलमार्ट (Walmart) के सामने अपनी बात रखी है। 1 अक्टूबर 2026 को दर्ज की गई इस याचिका में मुकेश बंसल, संजय बवेजा और अंकित नागौरी जैसे दिग्गज शामिल हैं, जो लंबे समय से कंपनी के आईपीओ (IPO) का इंतजार कर रहे हैं।
क्यों मचा है घमासान?
तनाव की मुख्य वजह जुलाई 2026 में हुआ बायबैक प्रोग्राम है। उस समय फ्लिपकार्ट ने $38.2 बिलियन के वैल्यूएशन पर केवल मौजूदा कर्मचारियों को ही शेयर भुनाने का मौका दिया था। कंपनी को शुरुआती वर्षों में ऊंचाई तक ले जाने वाले पूर्व अधिकारी खुद को इस प्रक्रिया से बाहर रखे जाने को लेकर असहज महसूस कर रहे हैं।
IPO में देरी और अनिश्चितता
कंपनी ने हाल ही में अपना लीगल बेस सिंगापुर से भारत शिफ्ट किया है, जिसे आईपीओ की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा था। लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार, लिस्टिंग अब साल 2028 तक टलती नजर आ रही है। इस अनिश्चितता के कारण पुराने शेयरधारकों के लिए अपने इक्विटी को कैश में बदलने का कोई स्पष्ट जरिया नहीं बचा है।
अगली रणनीति क्या हो सकती है?
इस याचिका में अमोद मालवीय, रवि गरिकिपति, मेकिन माहेश्वरी और अनुज चौधरी जैसे नाम भी शामिल हैं। वॉलमार्ट, जिसके पास फ्लिपकार्ट की लगभग 85% हिस्सेदारी है, ने फिलहाल याचिका मिलने की पुष्टि की है लेकिन कोई ठोस वादा नहीं किया है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि क्या वॉलमार्ट कोई नया लिक्विडिटी प्रोग्राम लाती है या आईपीओ की तारीख तय होने तक स्थिति यथावत बनी रहेगी।
