फ्रांस, इटली और स्पेन जैसे प्रमुख यूरोपीय देशों में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों और अस्थिरता ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसका सीधा असर यूरोप पर निर्भर भारतीय IT और एक्सपोर्ट कंपनियों के बिजनेस पर पड़ सकता है।
यूरोप के कई बड़े देशों में महंगाई, घर की बढ़ती कीमतों और वेतन में स्थिरता न आने के कारण भारी विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। फ्रांस, इटली, स्पेन, बेल्जियम, पुर्तगाल और अल्बानिया जैसे देशों के प्रमुख शहरों में स्थिति तनावपूर्ण है। सरकारों ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और कई जगहों पर सेना की तैनाती तक कर दी है, जिससे बिजनेस एक्टिविटी बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
भारतीय कंपनियों पर क्या है खतरा?
पेरिस और मिलान जैसे शहरों में सुरक्षा कारणों से लक्जरी रिटेल स्टोर और कमर्शियल दफ्तर बंद करने पड़ रहे हैं। इसका असर उन मल्टीनेशनल कंपनियों पर पड़ रहा है जो वहां की लॉजिस्टिक्स और रिटेल चैन पर निर्भर हैं।
भारत की बड़ी IT दिग्गज जैसे Tata Consultancy Services (TCS), Infosys और Wipro का एक बड़ा रेवेन्यू यूरोप से आता है। अगर वहां का आर्थिक माहौल खराब रहता है, तो वहां की कंपनियां अपने डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और कंसल्टिंग बजट में कटौती कर सकती हैं।
एक्सपोर्ट और करेंसी पर असर
यूरोपीय सरकारों पर पहले से ही भारी कर्ज का दबाव है, और अब सुरक्षा पर होने वाला एक्स्ट्रा खर्च उनकी आर्थिक विकास दर को और धीमा कर सकता है। इसका सीधा असर करेंसी मार्केट पर दिखेगा, जहां यूरो और ब्रिटिश पाउंड के मुकाबले भारतीय रुपया अस्थिर हो सकता है। टेक्सटाइल, फार्मा और इंजीनियरिंग गुड्स एक्सपोर्ट करने वाली भारतीय कंपनियों के लिए सप्लाई चेन में रुकावट और डिमांड में गिरावट एक बड़ा रिस्क बनी हुई है।
निवेशकों को सलाह है कि वे इन कंपनियों के मैनेजमेंट द्वारा आने वाले कमेंट्री और ऑर्डर पाइपलाइन पर बारीकी से नजर रखें।
