Euro में भारी गिरावट: फ्रांस के कर्ज संकट से 17 महीने के निचले स्तर पर लुढ़की करेंसी

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AuthorNeha Patil|Published at:
Euro में भारी गिरावट: फ्रांस के कर्ज संकट से 17 महीने के निचले स्तर पर लुढ़की करेंसी

फ्रांस की डगमगाती आर्थिक स्थिति के चलते Euro में बड़ी गिरावट आई है और यह **$1.1161** के स्तर पर पहुँच गया है। देश का कर्ज GDP के **119%** तक पहुँचने और बॉन्ड यील्ड में **2002** के बाद की सबसे बड़ी उछाल से निवेशक घबराए हुए हैं, जिससे सारा पैसा अब US Dollar की तरफ शिफ्ट हो रहा है।

बाजार में क्यों है डर का माहौल?

सोमवार के कारोबार में Euro $1.1161 तक गिर गया, जो पिछले 17 महीनों का सबसे निचला स्तर है। इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह फ्रांस की आर्थिक सेहत को लेकर निवेशकों की बढ़ती चिंता है। फ्रांस का कर्ज अब उसकी GDP का 119% हो चुका है, जो साल 1946 के बाद का सबसे खराब आंकड़ा है।

बॉन्ड मार्केट में क्या हो रहा है?

फ्रांस के कर्ज लेने की लागत तेजी से बढ़ रही है। फ्रेंच बॉन्ड और सुरक्षित माने जाने वाले जर्मन बॉन्ड के बीच का अंतर (Spread) पिछले एक दशक में सबसे ज्यादा हो गया है। हाल ही में फ्रांस की 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड बढ़कर 5% के करीब पहुँच गई है, जो 2002 के बाद पहली बार हुआ है। निवेशक फ्रेंच एसेट्स को जोखिम भरा मानकर अपना पैसा निकालकर जर्मन बॉन्ड में डाल रहे हैं।

राजनीतिक अस्थिरता और 2027 के चुनाव

आर्थिक मोर्चे पर ही नहीं, बल्कि राजनीति में भी अनिश्चितता है। 2027 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव को लेकर अभी से ही राजनीतिक खींचतान शुरू हो गई है, जिससे फिस्कल डेफिसिट को कम करने का कोई स्पष्ट प्लान नजर नहीं आ रहा है। यह अनिश्चितता Euro को लगातार कमजोर कर रही है।

US Dollar की मजबूती

एक तरफ Euro पस्त है, तो दूसरी तरफ US Dollar सुरक्षित ठिकाने (Safe Haven) के तौर पर चमक रहा है। हालांकि अमेरिका में जॉब ग्रोथ धीमी है, लेकिन ग्लोबल निवेशक Euro के बजाय डॉलर में पैसा रखना बेहतर समझ रहे हैं। अब European Central Bank के सामने बड़ी चुनौती है कि कैसे महंगाई को कंट्रोल किया जाए और साथ ही कर्ज के बढ़ते संकट को संभाला जाए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.