रुइया परिवार के स्वामित्व वाले Essar Group ने अपना बिजनेस मॉडल बदल लिया है। **₹1.37 लाख करोड़** का कर्ज चुकाने के बाद अब कंपनी 'एसेट-लाइट' स्ट्रैटेजी पर काम कर रही है, जिसके तहत स्टील और एनर्जी सेक्टर में ग्लोबल पार्टनरशिप्स पर जोर दिया जा रहा है।
Essar Group अपनी पुरानी 'एसेट-हैवी' छवि को पीछे छोड़ अब एक लीन और पार्टनर-ड्रिवन अप्रोच की तरफ बढ़ रहा है। कंपनी ने अब तक ₹1.37 लाख करोड़ का भारी-भरकम कर्ज चुकता किया है। इस बड़े बदलाव के पीछे मुख्य मकसद कंपनी को उन वित्तीय दबावों से बचाना है, जिनका सामना उसे अतीत में भारत में करना पड़ा था।
नई रणनीति: साझेदारी का मंत्र
कंपनी अब खुद अकेले बड़े प्रोजेक्ट्स में सारा रिस्क नहीं ले रही है। इसके बजाय, अब वे बाहरी इक्विटी पार्टनर्स को साथ लेकर चल रहे हैं। इससे फंडिंग का बोझ बंट जाता है और कंपनी का ऑपरेशन्स पर बेहतर कंट्रोल बना रहता है। यह अप्रोच पिछले कुछ सालों के उस दौर से बिल्कुल अलग है जब कंपनी बड़े कर्ज संकट और कॉरपोरेट रीस्ट्रक्चरिंग से गुजर रही थी।
स्टील और एनर्जी पर बड़ा दांव
ग्रुप का मुख्य ध्यान अब दो सेक्टर पर है:
- स्टील: अमेरिका के मिनेसोटा में 'Mesabi Metallics' प्रोजेक्ट को फिर से जीवित करने की कोशिश की जा रही है। यह आयरन ओर माइनिंग और पेलेट मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ा है।
- एनर्जी ट्रांजिशन: कंपनी ने Essar Energy Transition बनाई है, जिसमें 5 साल के भीतर $3.6 बिलियन का निवेश किया जाएगा। कंपनी अब तेल रिफाइनिंग से हटकर ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया जैसे लो-कार्बन समाधानों पर फोकस कर रही है। इसमें यूके (UK) स्थित Stanlow Refinery एक अहम कड़ी है।
निवेशकों के लिए रिस्क और भविष्य
कंपनी का कारोबार अब यूके, अमेरिका, भारत, सऊदी अरब और वियतनाम जैसे देशों में फैला हुआ है। हालांकि, अलग-अलग देशों के नियम-कानून और करेंसी में उतार-चढ़ाव कंपनी के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं। निवेशकों के लिए असली परीक्षा यह होगी कि कंपनी इन प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा कर पाती है या नहीं। बाहरी पार्टनर्स पर निर्भरता से कंपनी की डिसीजन-मेकिंग पावर पर क्या असर पड़ेगा, यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा।
