Indian Economy: ₹20 ट्रिलियन के लक्ष्य के लिए Equirus का 20-सूत्रीय प्लान, रेलवे IPO और फ्यूल GST पर जोर

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Indian Economy: ₹20 ट्रिलियन के लक्ष्य के लिए Equirus का 20-सूत्रीय प्लान, रेलवे IPO और फ्यूल GST पर जोर

रिसर्च फर्म Equirus ने भारत की अर्थव्यवस्था को 2036 तक $20 ट्रिलियन तक ले जाने का एक महत्वाकांक्षी रोडमैप तैयार किया है। इस प्लान में भारतीय रेलवे को लिस्ट करने, फ्लैट टैक्स रेट लागू करने और फ्यूल को GST के दायरे में लाने जैसे प्रमुख सुझाव शामिल हैं। हालांकि, यह प्लान भारी लिक्विडिटी और इंफ्रास्ट्रक्चर फंडिंग को अनलॉक करने का लक्ष्य रखता है, लेकिन इसके लिए ऐतिहासिक रुझानों से काफी अधिक, 18% की वार्षिक ग्रोथ रेट की ज़रूरत होगी।

क्या है Equirus का 20-सूत्रीय एजेंडा?

Equirus Securities ने एक विस्तृत रिसर्च रिपोर्ट जारी की है, जिसमें 20-सूत्रीय सुधार एजेंडा बताया गया है। इसका मकसद 2036 तक भारतीय अर्थव्यवस्था का मूल्यांकन $20 ट्रिलियन तक पहुंचाना है। यह प्लान पांच मुख्य स्तंभों पर केंद्रित है: रियल इकोनॉमी, कैपिटल मार्केट्स, ह्यूमन कैपिटल, सर्विस सेक्टर और गवर्नेंस। रिपोर्ट के अनुसार, इस बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत को सालाना लगभग 18% की नॉमिनल डॉलर ग्रोथ रेट बनाए रखनी होगी। साथ ही, रुपये में 3-3.6% की स्थिर मजबूती भी ज़रूरी होगी।

इंफ्रास्ट्रक्चर और कैपिटल मार्केट में बड़े बदलाव

इस रिपोर्ट का एक सबसे अहम सुझाव भारतीय रेलवे (Indian Railways) का पब्लिक लिस्टिंग (IPO) है। Equirus का अनुमान है कि रेलवे के IPO से $500 बिलियन का फंड जुटाया जा सकता है। इससे इंफ्रास्ट्रक्चर फंडिंग का बड़ा बोझ सरकारी खजाने से निकलकर कैपिटल मार्केट्स पर आ जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार, FY27 तक रेलवे को करीब ₹2.8 लाख करोड़ के कैपिटल एक्सपेंडिचर की ज़रूरत होगी। पब्लिक मार्केट एक्सेस से सरकार इस पैसे को अन्य ज़रूरी राष्ट्रीय कामों के लिए इस्तेमाल कर सकेगी।

एक और बड़ा सुझाव 'इंडिया सॉवरेन फंड' (India Sovereign Fund) का गठन है। पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (PSUs) की लगभग $249 बिलियन की इक्विटी को पूल करके, सरकार लगातार रिटर्न कमा सकती है और बजट पर निर्भरता कम कर सकती है। फर्म ने बॉन्ड और इक्विटी के लिए टैक्स नियमों को एक जैसा करने की भी सिफारिश की है। इससे कॉर्पोरेट बॉन्ड मार्केट ₹54 लाख करोड़ तक बढ़ सकता है और कंपनियों के लिए उधार लेने की लागत कम हो सकती है।

टैक्स और फ्यूल GST से लिक्विडिटी बढ़ाने के सुझाव

Equirus का तर्क है कि मौजूदा टैक्स सिस्टम से काफी वर्किंग कैपिटल फंसा हुआ है। फर्म ने इन्वेस्टमेंट इनकम पर 5% का फ्लैट TDS (Tax Deducted at Source) लगाने का प्रस्ताव दिया है, जबकि फाइनल टैक्स देनदारी सालाना फाइलिंग के दौरान तय होगी। एडवांस टैक्स को खत्म करने का भी सुझाव दिया गया है। फर्म का अनुमान है कि इन बदलावों से अर्थव्यवस्था में ₹13.4 लाख करोड़ का वर्किंग कैपिटल वापस आ सकता है।

इसके अलावा, रिपोर्ट में पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) के दायरे में लाने की वकालत की गई है। Equirus का अनुमान है कि 18% GST रेट से फ्यूल की कीमतें लगभग ₹19 प्रति लीटर कम हो सकती हैं, जिससे अर्थव्यवस्था में ₹5.5 लाख करोड़ आ सकते हैं। हालांकि, रिपोर्ट यह भी मानती है कि इससे केंद्र सरकार को ₹1.6 लाख करोड़ का नेट रेवेन्यू लॉस होगा।

आर्थिक अनुमान और जोखिम

हालांकि यह प्लान ग्रोथ का एक स्ट्रक्चर्ड रास्ता दिखाता है, लेकिन इसके लिए ऐसे अनुमानों की ज़रूरत है जो भारत के ऐतिहासिक प्रदर्शन से काफी ज़्यादा हैं। 18% नॉमिनल डॉलर ग्रोथ का लक्ष्य देश की सामान्य 10-11% ग्रोथ से काफी ऊपर है। इसे हासिल करने के लिए कई सेक्टर्स में लगातार और उच्च स्तर के एग्जीक्यूशन की ज़रूरत होगी। इसमें सर्विस सेक्टर में बड़ा बदलाव भी शामिल है, जिसे रिपोर्ट के अनुसार GDP में 54% से बढ़कर 65% से ज़्यादा करना होगा।

इसके अलावा, लागू करने में भी कई जोखिम हैं। स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स, जैसे कि राज्यों के लिए न्यूनतम कैपिटल एक्सपेंडिचर तय करना और राज्यों के बीच समन्वय को केंद्रीकृत करना, जटिल राजनीतिक और संघीय चुनौतियों का सामना करेंगे। इसके अलावा, फ्यूल को GST में लाने से होने वाला बड़ा रेवेन्यू प्रभाव और प्रमुख सरकारी कंपनियों की लिस्टिंग से जुड़ी अनिश्चितताएं भी बड़े वेरिएबल हैं। यह देखना बाकी है कि आने वाली नीतिगत चर्चाओं या सरकारी बजट प्लानिंग में इन सुझावों को कितना महत्व मिलता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.