Equirus की बड़ी सिफारिश: एडवांस टैक्स खत्म करने से ₹10 लाख करोड़ की पूंजी होगी आजाद!

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Equirus की बड़ी सिफारिश: एडवांस टैक्स खत्म करने से ₹10 लाख करोड़ की पूंजी होगी आजाद!

घरेलू ब्रोकरेज फर्म Equirus ने भारत की टैक्सेशन और सेविंग्स व्यवस्था में बड़े बदलाव का सुझाव दिया है। कंपनी का मानना है कि एडवांस टैक्स सिस्टम को खत्म करने से कॉर्पोरेट जगत के लिए लगभग **₹10 लाख करोड़** की वर्किंग कैपिटल (Working Capital) फ्री हो सकती है।

एडवांस टैक्स का झोल

Equirus की रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, एडवांस टैक्स वह सिस्टम है जिसके तहत कंपनियों और करदाताओं को फाइनेंशियल ईयर (Financial Year) खत्म होने से पहले अपनी अनुमानित वार्षिक कर देनदारी का एक हिस्सा किश्तों में चुकाना पड़ता है। फर्म का तर्क है कि यह सिस्टम व्यवसायों को उस आय पर भी टैक्स चुकाने के लिए मजबूर करता है जो उन्होंने अभी तक कमाई ही नहीं है। अगर किसी तिमाही में कंपनी की परफॉरमेंस कमजोर रहती है और उसने एडवांस टैक्स भर दिया है, तो गलत अनुमान के लिए उस पर ब्याज भी लग सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिका, यूके और चीन जैसे बड़े देश इस तरह के त्रैमासिक भुगतान ढांचे पर काम नहीं करते हैं।

₹4 लाख करोड़ के रिफंड का बोझ

Equirus का कहना है कि इस एडवांस टैक्स सिस्टम की वजह से सरकार को हर साल भारी भरकम टैक्स रिफंड (Tax Refund) भी जारी करना पड़ता है, जो ₹4 लाख करोड़ से भी ज्यादा हो चुका है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि अनुमानों के आधार पर टैक्स वसूला जाता है, जबकि असल कमाई अलग हो सकती है। अगर इस सिस्टम को हटाया जाए, तो कंपनियां इस अटकी हुई पूंजी का इस्तेमाल अपने बिज़नेस ग्रोथ और आर्थिक गतिविधियों में कर सकेंगी, बजाय सरकार से रिफंड का इंतजार करने के।

स्मॉल सेविंग स्कीम्स पर भी सुझाव

रिपोर्ट में पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) और सीनियर सिटिजन्स सेविंग स्कीम जैसी स्मॉल सेविंग स्कीम्स (Small Savings Schemes) को धीरे-धीरे कम करने का भी सुझाव दिया गया है। Equirus का मानना है कि इन स्कीम्स पर सरकार द्वारा तय की जाने वाली ब्याज दरें अक्सर मार्केट-प्राइस्ड बॉन्ड यील्ड (Bond Yield) से ज्यादा होती हैं। इससे बॉन्ड मार्केट में विकृति आती है और पूंजी उस जगह नहीं जा पाती जहां उसे बेहतर ढंग से प्राइस (Price) किया जा सके। फर्म का सुझाव है कि इन फंडों का कुछ हिस्सा मार्केट-प्राइस्ड बॉन्ड्स की ओर मोड़ने से कैपिटल मार्केट्स (Capital Markets) को बढ़ावा मिल सकता है।

क्या सरकार मानेगी ये सुझाव?

हालांकि, इन सुझावों के साथ कुछ बड़ी चुनौतियां भी जुड़ी हैं। एडवांस टैक्स कलेक्शन सरकारी राजस्व का एक अहम हिस्सा है। इसे हटाने से सरकार के कैश फ्लो (Cash Flow) में दिक्कत आ सकती है। वहीं, स्मॉल सेविंग स्कीम्स लाखों छोटे निवेशकों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए सुरक्षा और स्थिर रिटर्न का जरिया हैं। इनमें कोई भी बड़ा बदलाव राजनीतिक और सामाजिक विरोध का सामना कर सकता है।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ये सिर्फ एक निजी ब्रोकरेज फर्म के रिसर्च प्रपोजल हैं और सरकार की नीति में तत्काल बदलाव का संकेत नहीं हैं। निवेशकों और आर्थिक जानकारों को यह देखना होगा कि क्या इन विचारों को भविष्य में नीतिगत चर्चाओं में जगह मिलती है या सरकार राजस्व स्थिरता के लिए मौजूदा ढांचे को बनाए रखती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.