**Equirus** की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत **2036** तक **$20 ट्रिलियन** की इकोनॉमी बन सकता है। इसके लिए **20-पॉइंट** रिफॉर्म प्लान पेश किया गया है, जो मौजूदा अनुमानों से **10 साल** पहले लक्ष्य हासिल करा सकता है। इस प्लान में सर्विस सेक्टर को बढ़ावा देने, बॉन्ड मार्केट को मजबूत करने और सरकारी कंपनियों में सुधार पर जोर दिया गया है। हालांकि, इन सुधारों का सफल कार्यान्वयन ही असली चुनौती होगी।
Equirus का 20-पॉइंट एजेंडा
Equirus नामक इन्वेस्टमेंट फर्म ने भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर एक महत्वाकांक्षी योजना पेश की है। फर्म का मानना है कि अगर उनके 20-पॉइंट रिफॉर्म एजेंडे को पूरी तरह से लागू किया जाए, तो भारत 2036 तक $20 ट्रिलियन की इकोनॉमी बन सकता है। यह लक्ष्य मौजूदा अनुमानों से पूरे 10 साल पहले हासिल कर लिया जाएगा, जो आमतौर पर 2047 तक का अनुमान लगाते हैं। फर्म का कहना है कि इस लक्ष्य को पाने के लिए सभी 20 सुधारों को एक साथ लागू करना ज़रूरी होगा, न कि एक-एक करके।
सर्विस सेक्टर पर बढ़ेगा फोकस
इस योजना का मुख्य केंद्र सर्विस सेक्टर होगा, जिसमें फाइनेंशियल मार्केट्स, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स, टूरिज्म और एजुकेशन जैसे क्षेत्र शामिल हैं। हालांकि मैन्युफैक्चरिंग भी अहम है, पर इस रोडमैप में सर्विस सेक्टर को ग्रोथ का सबसे बड़ा इंजन बताया गया है। रिपोर्ट यह भी कहती है कि इस रफ्तार के लिए भारतीय रुपये का डॉलर के मुकाबले बहुत ज़्यादा मजबूत होना ज़रूरी नहीं है; घरेलू उत्पादकता में बढ़ोतरी ही इस ग्रोथ को सहारा दे सकती है।
बॉन्ड मार्केट को मिलेगी नई जान?
एक अहम सुझाव कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट को लेकर है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह मार्केट इक्विटी मार्केट की तुलना में अभी काफी छोटा है। इसे बढ़ावा देने के लिए, फर्म ने कुछ खास तरह के डेट प्रोडक्ट्स को मिलने वाले टैक्स बेनिफिट्स को खत्म करने और बॉन्ड व इक्विटी के बीच पॉलिसी पैरिटी (समानता) लाने की सिफारिश की है। इसका मकसद एक ऐसी व्यवस्था बनाना है जहां बॉन्ड की तुलना सिर्फ बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट से न हो, जिससे कंपनियों को लंबी अवधि के निवेश के लिए कैपिटल मिल सके।
सरकारी कंपनियों में सुधार की ज़रूरत
इसके अलावा, रिपोर्ट में सरकारी संपत्तियों की संरचना पर भी बात की गई है। सुझाव दिया गया है कि Indian Railways को स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट किया जाए, जबकि सरकार की मालिकाना हक बना रहे। इसकी तुलना पिछले दशकों में टेलीकॉम सेक्टर के कॉर्पोरेटाइजेशन और डिसइन्वेस्टमेंट से की गई है। साथ ही, विभिन्न सरकारी कंपनियों को Temasek Holdings (सिंगापुर) या Abu Dhabi Investment Authority की तरह एक होल्डिंग कंपनी के तहत लाने का प्रस्ताव है। ऐसा करने से सरकारी संपत्तियों का मैनेजमेंट ज़्यादा प्रोफेशनल हो सकेगा और सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश के लिए पब्लिक फंड भी फ्री होंगे।
आगे की राह और चुनौतियां
यह रोडमैप भारत की संभावनाओं को लेकर उम्मीद जगाता है, लेकिन निवेशकों और पॉलिसीमेकर्स को कई स्ट्रक्चरल रिस्क का सामना करना पड़ सकता है। इकोनॉमिक हिस्टोरियन अक्सर 'मिडिल- इनकम ट्रैप' का ज़िक्र करते हैं, जहां डेवलपिंग इकोनॉमी हाई- इनकम स्टेटस तक पहुंचने में संघर्ष करती हैं। Equirus की रिपोर्ट भी इसी ओर इशारा करती है कि लगातार सुधार ज़रूरी है, जो एक बड़े लोकतंत्र में एक बड़ी राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौती है।
वैश्विक आर्थिक झटके, जियोपॉलिटिकल अस्थिरता और लगातार बनी रहने वाली घरेलू मांग जैसे बाहरी कारक भी इन लक्ष्यों की प्राप्ति में अहम भूमिका निभाएंगे। सरकार का अपना लक्ष्य 2047 तक $30 ट्रिलियन की इकोनॉमी बनना है, जिसके लिए वह लगातार बदलाव और ट्रेड एग्रीमेंट्स कर रही है। आने वाले समय में, मार्केट पार्टिसिपेंट्स पॉलिसी रिफॉर्म्स की रफ्तार, लेबर मार्केट में एडजस्टमेंट और प्रोडक्टिविटी डेटा पर नज़र रखेंगे, ताकि यह पता चल सके कि देश इन महत्वाकांक्षी ग्रोथ टारगेट्स की ओर बढ़ रहा है या नहीं।
