इमर्जिंग मार्केट्स में सुधार के बावजूद आम जनता की बढ़ती नाराजगी निवेशकों के लिए चिंता का विषय बन गई है। आर्थिक वृद्धि और सामाजिक स्थिरता के बीच का यह संघर्ष बाजार के सेंटीमेंट को कैसे प्रभावित कर सकता है, आइए समझते हैं।
दुनियाभर के इमर्जिंग मार्केट्स में इस वक्त एक अजीब सी स्थिति बनी हुई है। एक तरफ 4% की मजबूत ग्रोथ रेट है, जो कई विकसित देशों से बेहतर है, तो दूसरी तरफ अर्जेंटीना, मोरक्को और श्रीलंका जैसे देशों में आम जनता का गुस्सा बढ़ रहा है।
फिस्कल रिफॉर्म्स की भारी कीमत
सरकारें कर्ज कम करने और विदेशी निवेशकों को लुभाने के लिए फिस्कल कंसोलिडेशन (Fiscal Consolidation) का रास्ता अपनाती हैं। इसके तहत खाने-पीने और ईंधन जैसी जरूरी चीजों पर मिलने वाली सब्सिडी में कटौती कर दी जाती है। कई विकासशील देशों में एक परिवार के बजट का 50% हिस्सा इन्हीं बुनियादी जरूरतों पर खर्च होता है। सब्सिडी हटने या करेंसी कमजोर होने से महंगाई का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ता है, जो सामाजिक अस्थिरता का बड़ा कारण बनता है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
निवेशकों को यह समझना होगा कि राजनीतिक अस्थिरता सीधे तौर पर फाइनेंशियल रिस्क है। यदि जनता का आक्रोश बढ़ता है, तो सरकारों को अपने रिफॉर्म्स को बीच में ही रोकना पड़ सकता है। इससे फिजूलखर्ची बढ़ती है और महंगाई बेकाबू हो सकती है। रिस्क एनालिस्ट 'Verisk Maplecroft' के आंकड़े बताते हैं कि पिछले एक दशक में नागरिक अशांति के मामले लगातार बढ़े हैं, जो यह संकेत देते हैं कि इमर्जिंग मार्केट्स का सोशल कॉन्ट्रैक्ट दबाव में है।
भारत के लिए क्या हैं मायने?
भारत ने टारगेटेड इंफ्रास्ट्रक्चर स्पेंडिंग और डिजिटल बेनिफिट्स ट्रांसफर के जरिए ग्रोथ और वेलफेयर के बीच एक संतुलन बनाने की कोशिश की है। हालांकि, आने वाले एक दशक में 1.2 बिलियन लोग वर्कफोर्स में शामिल होने वाले हैं, जिससे नौकरियों के अवसर पैदा करने का दबाव बढ़ेगा। अगर वैश्विक बाजारों में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ती है, तो अंतरराष्ट्रीय पूंजी 'रिस्क-ऑफ' मोड में आ सकती है, जिसका असर लिक्विडिटी पर पड़ सकता है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
आने वाली तिमाहियों में निवेशकों को यह देखना होगा कि सरकारें फिस्कल अनुशासन और सामाजिक जरूरतों के बीच तालमेल कैसे बिठाती हैं। यदि राजनीतिक नेतृत्व लॉन्ग-टर्म स्ट्रक्चरल हेल्थ की जगह शॉर्ट-टर्म लोकलुभावन वादों को चुनता है, तो बाजार में वोलेटिलिटी (Volatility) बढ़ सकती है।
