Elon Musk ने आरोप लगाया है कि भारतीय कारोबारी Starlink की एंट्री रोक रहे हैं, जिसे सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया है। वहीं, अमेरिका में **$366 मिलियन** के पॉलिटिकल डोनेशन को लेकर मस्क सवालों के घेरे में हैं।
भारत में Starlink पर तकरार
Elon Musk ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि भारत के बड़े बिजनेस घराने Starlink के मार्केट में आने में बाधा डाल रहे हैं, उन्होंने इसके लिए इशारों-इशारों में Reliance Industries के चेयरमैन मुकेश अंबानी की ओर निशाना साधा। हालांकि, भारत सरकार के संचार मंत्रालय ने इन आरोपों को गलत बताया है। सरकार का कहना है कि नियम सभी के लिए पारदर्शी हैं और किसी भी प्राइवेट कंपनी को फेवर नहीं किया जा रहा है। Starlink को अभी फाइनल सिक्योरिटी क्लीयरेंस और स्पेक्ट्रम अलॉटमेंट का इंतजार है, जो कि एक अनिवार्य प्रक्रिया है।
अमेरिका में सियासी घमासान
भारत के बाहर, अमेरिका में एलन मस्क को Senator Bernie Sanders के तीखे विरोध का सामना करना पड़ रहा है। मामला $366 मिलियन के उस चुनावी चंदे से जुड़ा है, जो मस्क ने रिपब्लिकन उम्मीदवारों को दिया है। आलोचकों का कहना है कि इतनी बड़ी रकम का इस्तेमाल अमेरिकी लोकतंत्र को प्रभावित कर सकता है और इसे 'ओलिगार्ची' (कुलीनतंत्र) की ओर बढ़ने वाला कदम करार दिया जा रहा है।
निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
यह स्थिति निवेशकों के लिए दो तरफा रिस्क लेकर आई है। भारत में, निवेशकों की नजरें स्पेक्ट्रम अलॉटमेंट की टाइमलाइन पर टिकी हैं, जो टेलीकॉम सेक्टर की कॉम्पिटिटिव डायनामिक्स तय करेगी। वहीं, अमेरिका में मस्क का पॉलिटिकल इन्वेस्टमेंट उनके अन्य बिजनेस जैसे Tesla और SpaceX के लिए रेगुलेटरी माहौल को कैसे प्रभावित करता है, यह देखना अहम होगा। फिलहाल, मार्केट अब सरकार की अगली स्पेक्ट्रम पॉलिसी अपडेट का इंतजार कर रहा है।
