भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए बड़ी खुशखबरी है। सरकार ने PLI स्कीम के तहत इस सेक्टर को **₹19,091 करोड़** की प्रोत्साहन राशि जारी की है, जो कुल बांटी गई राशि का आधा हिस्सा है।
मैन्युफैक्चरिंग का नया हब
भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के सरकार के विजन को बड़ा बूस्ट मिला है। DPIIT के आंकड़ों के मुताबिक, 30 जून 2026 तक कुल ₹36,754 करोड़ की प्रोत्साहन राशि बांटी गई है, जिसमें से सबसे बड़ा हिस्सा इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर की झोली में गया है। इस सेक्टर में कंपनियों ने ₹20,580 करोड़ से ज्यादा का कैपिटल इन्वेस्टमेंट किया है, जिससे बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स तैयार हुई हैं।
एक्सपोर्ट में रॉकेट जैसी तेजी
सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो इस निवेश का सीधा असर एक्सपोर्ट पर दिखा है। फाइनेंशियल ईयर 2021-22 में जो एक्सपोर्ट $5.5 बिलियन था, वह 2025-26 तक बढ़कर लगभग $30 बिलियन तक पहुंच गया है। सरकार ने इस प्रोग्राम को 1 साल के लिए और बढ़ा दिया है, ताकि मैन्युफैक्चरर्स को अपनी कैपेसिटी बढ़ाने का पूरा मौका मिले।
अन्य सेक्टर का हाल
इलेक्ट्रॉनिक्स के बाद फार्मास्यूटिकल सेक्टर को ₹6,662 करोड़, फूड प्रोसेसिंग को ₹3,271.44 करोड़ और ऑटोमोटिव इंडस्ट्री को ₹3,174.15 करोड़ का इंसेंटिव मिला है।
निवेशकों के लिए असली चुनौती
इन्वेस्टर्स के लिए अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकारी सब्सिडी खत्म होने के बाद भी ये कंपनियां मुनाफा कमा पाएंगी? इलेक्ट्रॉनिक्स PLI स्कीम अब अपने अंतिम चरण में है। लॉन्ग टर्म में कंपनियों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे बिना सरकारी मदद के ग्लोबल मार्केट में कितनी कॉम्पिटिटिव बनी रहती हैं। अब निवेशकों को यह देखना होगा कि क्या कंपनियां अपनी ऑपरेशनल एफिशिएंसी को बेहतर बना पा रही हैं और हाई-वैल्यू प्रोडक्ट्स पर फोकस कर रही हैं या नहीं।
