Voter List में गड़बड़ी के आरोपों के बीच 2 अक्टूबर 2026 को दिल्ली और मुंबई में जोरदार विरोध प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, जिससे देश में राजनीतिक अस्थिरता का माहौल बन गया है।
चुनावी प्रक्रिया पर उठे सवाल\n\nदेश भर में बढ़ते प्रदर्शनों का मुख्य कारण 'Special Intensive Revision' (SIR) के दौरान हुई गड़बड़ियां बताई जा रही हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में लाखों योग्य वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए, जिससे चुनावी निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रदर्शन में छात्र संगठनों के साथ-साथ Cockroach Janta Party (CJP) भी सक्रिय रूप से शामिल रही।\n\n### अंदरूनी कलह और संस्थागत संकट\n\nमामला सिर्फ बाहर ही नहीं, चुनाव आयोग के भीतर भी गरमाया हुआ है। रिपोर्ट्स के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त के दो सहयोगियों ने पिछले 10 महीनों में ECI के डिजिटल सिस्टम और रजिस्ट्रेशन प्रोसेस को लेकर 14 अलग-अलग आपत्तियां दर्ज कराई हैं। संस्था के अंदर चल रहे इन मतभेदों ने विपक्ष (INDIA bloc) को सरकार पर हमला करने का बड़ा मौका दे दिया है।\n\n### क्या है कानून और निवेश का नजरिया?\n\nसरकार और चुनाव आयोग ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है और कहा है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रही है। गौरतलब है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत, CEC को हटाना एक जटिल प्रक्रिया है, जो सुप्रीम कोर्ट के जज के महाभियोग के समान है।\n\nनिवेशकों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय हो सकती है। 6 अक्टूबर 2026 को INDIA bloc द्वारा घोषित मार्च के बाद तनाव और बढ़ने की आशंका है। मार्केट एक्सपर्ट्स इस पूरे घटनाक्रम पर बारीक नजर रखे हुए हैं, क्योंकि राजनीतिक ध्रुवीकरण का सीधा असर बाजार की सेंटिमेंट पर पड़ सकता है।