भारत के कृषि सेक्टर पर El Niño का गंभीर खतरा मंडरा रहा है। मानसून की कमी और पानी की किल्लत से रबी की फसल खतरे में है, जिसका सीधा असर FMCG और टू-व्हीलर कंपनियों की डिमांड पर पड़ सकता है।
भारत के कृषि क्षेत्र के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण हो गई है। ऐतिहासिक El Niño के असर से दक्षिण-पश्चिम मानसून में 13% की कमी दर्ज की गई है, जो 2015 के बाद से सबसे बड़ी गिरावट है। नतीजतन, कृषि विकास दर जो पिछले साल 4.2% थी, वह फिसलकर चालू फाइनेंशियल ईयर में 3% रह गई है। पानी की कमी और 2027 में भीषण गर्मी की संभावना ने रबी की फसल (गेहूं) के लिए चिंता बढ़ा दी है।
बाजार पर असर
ग्रामीण इलाकों में लोगों की वास्तविक आय (Real Wages) में 2% की गिरावट आई है। बढ़ती फूड इन्फ्लेशन और घटती कमाई के कारण ग्रामीण इलाकों में खर्च करने की क्षमता कम हो गई है। इसका सीधा असर उन कंपनियों पर पड़ेगा जो ग्रामीण भारत पर निर्भर हैं, जैसे कि FMCG और टू-व्हीलर मैन्युफैक्चरर्स। अगर बिक्री का वॉल्यूम घटता है, तो कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव आना तय है।
बैंकिंग और माइक्रोफाइनेंस पर नजर
फसलों के खराब होने का सीधा असर उन फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस पर भी होगा जो रूरल लेंडिंग और माइक्रोफाइनेंस में सक्रिय हैं। किसानों की लोन चुकाने की क्षमता कम होने से लेंडर्स का क्रेडिट कॉस्ट बढ़ सकता है।
सरकारी कदम और महंगाई
कर्नाटक, महाराष्ट्र और तेलंगाना जैसे राज्यों ने पहले ही सूखे जैसे हालात की घोषणा कर दी है। महंगाई को काबू में रखने के लिए सेंट्रल बैंक को सख्त मॉनेटरी पॉलिसी अपनानी पड़ सकती है, जिससे कर्ज लेना महंगा बना रहेगा। निवेशकों को अब आने वाले महीनों में विंटर प्लांटिंग के आंकड़ों, सरकार के रिलीफ पैकेज और FMCG कंपनियों के अर्निंग्स रिपोर्ट्स पर बारीक नजर रखनी होगी।
