GST काउंसिल की बैठक से पहले EY India के CEO राजीव मेमानी ने टैक्स रिफंड में तेजी और ऑडिट प्रक्रिया को सरल बनाने का सुझाव दिया है, जिससे वर्किंग कैपिटल की बाधाएं खत्म हो सकें।
टैक्स रिफॉर्म्स का रोडमैप\n\nGST काउंसिल की आगामी बैठक से पहले, EY India के चेयरमैन और CEO राजीव मेमानी ने निवेश की रफ्तार बनाए रखने के लिए प्रशासनिक सुधारों पर जोर दिया है। कंपनी ने बिजनेस की रुकावटों को कम करने के लिए मुख्य रूप से लिक्विडिटी और कंप्लायंस पर फोकस करने का सुझाव दिया है।\n\n### मुख्य सिफारिशें:\n\n* GST रिफंड प्रक्रिया: रिफंड में हो रही देरी को कम करना ताकि कंपनियों का फंसा हुआ पैसा बाहर आ सके।\n* इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC): कैपिटल गुड्स और सर्विसेज पर आ रही तकनीकी समस्याओं का समाधान करना।\n* ऑडिट का एकीकरण: वर्तमान में कई ओवरलैपिंग ऑडिट के कारण कंपनियों पर प्रशासनिक लागत बढ़ रही है। इन्हें एक सेंट्रलाइज्ड प्रक्रिया में बदलने से कंपनियों का ध्यान ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर बढ़ेगा।\n\n### निवेशकों पर क्या असर होगा?\n\nइन्वेस्टर्स के लिए यह खबर काफी अहम है क्योंकि इसका सीधा असर कंपनियों के कैश फ्लो पर पड़ता है। जब कैपिटल सिस्टम में फंसी रहती है, तो कंपनियों की विकास क्षमता और कर्ज घटाने की रफ्तार प्रभावित होती है। मेमानी का मानना है कि टैक्स नीतियों में सरलता भारत के $100 अरब सालाना FDI लक्ष्य को हासिल करने में मददगार साबित होगी।\n\nइसके अलावा, ग्लोबल निवेशकों के लिए टैक्स विवादों में अनिश्चितता अब भी एक बड़ी चिंता है। अंतरिक्ष, डिफेंस और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टर्स में विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए एक स्थिर और भरोसेमंद टैक्स माहौल बेहद जरूरी है। हालांकि EY India एक प्राइवेट फर्म है और लिस्टेड नहीं है, लेकिन इस तरह के नीतिगत बदलावों का असर शेयर बाजार की तमाम कंपनियों के मार्जिन पर पड़ सकता है।