European Commission अपनी 'Corporate Resource for Europe' (CORE) पॉलिसी में बड़ा बदलाव कर रही है। अब यूरोप में **€100 मिलियन** से ज्यादा सालाना रेवेन्यू वाली सभी बड़ी कंपनियों पर एक नया टैक्स शुल्क लगाया जाएगा, ताकि अमेरिकी रिटेलिएशन (Retaliatory Tariffs) से बचा जा सके।
टैक्स के नए दायरे में कौन?
यूरोपीय आयोग (European Commission) अपनी फिजिकल स्ट्रैटेजी को पूरी तरह से बदल रहा है। पहले ये योजना सिर्फ डिजिटल कंपनियों तक सीमित थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर सभी बड़े सेक्टरों के लिए कर दिया गया है। नया प्रपोजल उन सभी कंपनियों को कवर करेगा जिनका सालाना रेवेन्यू €100 मिलियन से अधिक है। इसके तहत कंपनियों को सालाना €1,00,000 से लेकर €7,50,000 तक का लम्प-सम कंट्रीब्यूशन देना पड़ सकता है।
अमेरिका के साथ ट्रेड वॉर का डर
इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका का दबाव है। डोनाल्ड ट्रम्प पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि अगर कोई देश अमेरिकी डिजिटल कंपनियों को टारगेट करने वाला टैक्स लगाता है, तो वे भारी टैरिफ लगाएंगे। इसी से बचने के लिए यूरोप अब एक 'नॉन-डिस्क्रिमिनेटरी' फ्रेमवर्क बना रहा है ताकि इसे किसी खास देश या सेक्टर के खिलाफ न माना जाए।
राह में चुनौतियां
हालांकि यह प्रपोजल अभी शुरुआती चर्चा के दौर में है, लेकिन इसे लागू करना आसान नहीं होगा। यूरोपीय संघ के नियमों के मुताबिक, किसी भी नए टैक्स के लिए सभी सदस्य देशों की सहमति जरूरी है, जो आर्थिक हितों के टकराव के चलते मिलना मुश्किल हो सकता है। फिलहाल यह 2028-2034 के मल्टी-एन्युअल फाइनेंशियल फ्रेमवर्क का हिस्सा है। निवेशकों के लिए इस पर नजर रखना जरूरी है क्योंकि इससे बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियों की ऑपरेशनल कॉस्ट सीधे तौर पर प्रभावित होगी।
