सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए मध्य प्रदेश के 24 जिलों में 1 अक्टूबर, 2026 से ESIC स्कीम को अनिवार्य कर दिया है। अब इन क्षेत्रों के एंप्लॉयर्स को अपने कर्मचारियों के लिए सोशल सिक्योरिटी फंड में योगदान देना होगा, जिससे बिजनेस की लागत बढ़ सकती है।
नियम और नई जिम्मेदारी
श्रम और रोजगार मंत्रालय ने 1 अक्टूबर, 2026 से मध्य प्रदेश के 24 जिलों में ESIC को अनिवार्य कर दिया है। अब इन क्षेत्रों में काम करने वाली सभी कंपनियों को 'Employees’ State Insurance Act, 1948' का सख्ती से पालन करना होगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य टियर-2 और टियर-3 शहरों में काम करने वाले कर्मचारियों को हेल्थ और इंश्योरेंस का सुरक्षा कवच देना है।
बिजनेस पर क्या होगा असर?
कंपनियों को अब अपने पेरोल सिस्टम में बदलाव करने होंगे और एक्ट के सेक्शन 29 के तहत योगदान देना शुरू करना होगा। इससे कंपनियों के लिए एंप्लॉयमेंट कॉस्ट में सीधी बढ़ोतरी देखी जाएगी। कर्मचारियों को तो मेडिकल, मैटरनिटी और डिसेबिलिटी बेनिफिट्स मिलेंगे, लेकिन मालिकों के लिए यह एडमिनिस्ट्रेटिव और फाइनेंशियल जिम्मेदारी का विषय बन गया है।
इन जिलों पर लागू होगा आदेश
जिन 24 जिलों को कवर किया गया है, उनमें आगर मालवा, अलीराजपुर, अनूपपुर, अशोकनगर, बालाघाट, बड़वानी, बैतूल, छतरपुर, दमोह, दतिया, हरदा, झाबुआ, मंडला, नरसिंहपुर, पन्ना, राजगढ़, सिवनी, श्योपुर, शिवपुरी, सीधी, टीकमगढ़, उमरिया, विदिशा और डिंडोरी शामिल हैं। इसके अलावा, निवाड़ी जिले को 'Code on Social Security, 2020' के दायरे में लाया गया है।
निवेशकों के लिए संकेत
बिजनेस मालिकों को डेडलाइन से पहले अपने पेरोल प्रोसेस को अपडेट करने की सलाह दी गई है, ताकि किसी भी तरह की पेनल्टी या रेगुलेटरी कार्रवाई से बचा जा सके। आने वाली तिमाहियों में इन क्षेत्रों में काम करने वाली लिस्टेड कंपनियों के मार्जिन पर लेबर कॉस्ट बढ़ने का असर दिख सकता है, इसलिए निवेशकों को लेबर लॉ के प्रति सरकार के इस कड़े रुख पर नजर रखनी चाहिए।
