ESG Risk: क्या महामारी का खतरा बिगाड़ेगा भारतीय कंपनियों का खेल? बढ़ सकते हैं कड़े नियम

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AuthorNeha Patil|Published at:
ESG Risk: क्या महामारी का खतरा बिगाड़ेगा भारतीय कंपनियों का खेल? बढ़ सकते हैं कड़े नियम

ग्लोबल स्तर पर अब जैव विविधता (biodiversity) के नुकसान को सीधे महामारी से जोड़कर देखा जा रहा है। इसका सीधा असर भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर, माइनिंग और रियल एस्टेट सेक्टर पर पड़ सकता है, जहां अब पर्यावरण संबंधी नियम और कड़े हो सकते हैं।

दुनिया भर में बढ़ती महामारियों को अब केवल हेल्थ इश्यू नहीं, बल्कि एक आर्थिक खतरा (economic risk) माना जा रहा है। ग्लोबल पॉलिसी में आए इस बदलाव का मतलब है कि अब पर्यावरण को बचाना 'हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर' का ही हिस्सा है। भारत जैसे देश में, जहां माइनिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सेक्टर जमीन के इस्तेमाल पर निर्भर हैं, वहां आने वाले समय में रेग्युलेटरी चुनौतियां बढ़ सकती हैं।

क्यों बदल रहा है नजरिया?

पहले जंगल बचाना आर्थिक विकास की राह में बाधा माना जाता था, लेकिन अब एक्सपर्ट्स का तर्क है कि महामारियों से होने वाला आर्थिक नुकसान, पर्यावरण संरक्षण पर होने वाले खर्च से कहीं ज्यादा है। ग्लोबल इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स अब ESG (एनवायर्नमेंटल, सोशल एंड गवर्नेंस) अनुपालन को प्राथमिकता दे रहे हैं। जो कंपनियां अपने एनवायर्नमेंटल फुटप्रिंट को सही तरीके से मैनेज नहीं कर पाएंगी, उन्हें भारी जुर्माने और निवेशकों की तरफ से डिवेस्टमेंट (divestment) का सामना करना पड़ सकता है।

भारतीय कंपनियों पर असर

खासकर उन प्रोजेक्ट्स पर अब बारीकी से नजर रखी जाएगी जो जंगलों या संवेदनशील इलाकों (जैसे नॉर्थ बंगाल या तटीय मैंग्रोव) के पास स्थित हैं। पर्यावरण को लेकर अब मंजूरी की प्रक्रिया लंबी हो सकती है। क्लाइमेट चेंज की वजह से वन्यजीवों का पलायन भी एक बड़ी चुनौती है, जिससे औद्योगिक गतिविधियों के लिए जमीन हासिल करना और कठिन हो सकता है। इसका परिणाम प्रोजेक्ट्स में देरी और कानूनी बाधाओं के रूप में सामने आ सकता है।

निवेशकों के लिए संकेत

निवेशकों को यह देखना होगा कि कैसे ये नए मानक कंपनियों के कैपिटल एक्सपेंडिचर और ऑपरेशनल लागत को प्रभावित करते हैं। भविष्य में, जिन कंपनियों के पास मजबूत सस्टेनेबिलिटी फ्रेमवर्क होगा, वही इन चुनौतियों का सामना कर पाएंगी। रिसोर्स-इंटेंसिव सेक्टर में काम करने वाली कंपनियों के लिए अब 'कॉस्ट ऑफ डूइंग बिजनेस' बढ़ सकता है, क्योंकि पर्यावरण अनुपालन और रिस्क मैनेजमेंट पर भारी प्रीमियम खर्च करना होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.