EPFO Wage Ceiling: अब ₹25,000 तक की सैलरी पर अनिवार्य PF योगदान, कंपनियों के मार्जिन पर पड़ेगा असर

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
EPFO Wage Ceiling: अब ₹25,000 तक की सैलरी पर अनिवार्य PF योगदान, कंपनियों के मार्जिन पर पड़ेगा असर

Union Cabinet ने EPFO की अनिवार्य वेतन सीमा को **₹15,000** से बढ़ाकर **₹25,000** कर दिया है। इस फैसले से लगभग **51 लाख** कर्मचारियों को फायदा होगा, लेकिन लेबर-इंटेंसिव कंपनियों के लिए कर्मचारी लागत (Employee Cost) बढ़ना तय है, जो उनके प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव डाल सकता है।

केंद्र सरकार ने 2014 के बाद पहली बार EPFO की वेतन सीमा में बड़ा बदलाव किया है। इस कदम से वे कर्मचारी जो ₹15,000 से ₹25,000 के वेतन ब्रैकेट में आते हैं, अब कानूनी रूप से रिटायरमेंट सुरक्षा के दायरे में आ गए हैं।

कंपनियों के मुनाफे पर क्या असर?

कंपनियों के लिए यह प्रशासनिक बदलाव उनके ऑपरेटिंग खर्चों में सीधी बढ़ोतरी लेकर आया है। कानून के मुताबिक, कंपनी को कर्मचारी के पीएफ फंड में समान योगदान देना होता है। अब नई सीमा लागू होने से कंपनियों को उन कर्मचारियों के लिए भी अतिरिक्त पैसा देना होगा, जो पहले इस अनिवार्य योगदान की सीमा से बाहर थे। विशेष रूप से रिटेल, कंस्ट्रक्शन, टेक्सटाइल और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर, जहां प्रॉफिट मार्जिन पहले ही कम होते हैं, वहां कंपनियों को अपनी कीमतों में बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है या प्रोडक्टिविटी पर अधिक ध्यान देना होगा।

सरकार का फैसला और सुप्रीम कोर्ट की भूमिका

यह फैसला सुप्रीम कोर्ट द्वारा वेतन सीमा को लंबे समय तक स्थिर रखने पर उठाए गए सवालों के बाद आया है। National Statistics Office (NSO) के हालिया आंकड़ों के अनुसार, 2025 में पुरुषों की औसत मासिक आय ₹24,217 और महिलाओं की ₹18,353 दर्ज की गई थी। इस नए बदलाव के साथ, सरकार ने वर्कफोर्स के एक बड़े हिस्से को फॉर्मल इकोनॉमी से जोड़ने का प्रयास किया है।

क्या इससे रोजगार बढ़ेंगे?

बाजार जानकारों का मानना है कि यह कदम मौजूदा कर्मचारियों के लिए सोशल सिक्योरिटी को बेहतर बनाने वाला है, लेकिन यह सीधे तौर पर नौकरियों की संख्या में इजाफा करने वाला नहीं है। वर्तमान में भारत में रेगुलर सैलरीड एंप्लॉयमेंट 23.6% है और शहरी बेरोजगारी दर 6.8% के आसपास बनी हुई है। निवेशकों के लिए अब नजर इस बात पर होगी कि आने वाली तिमाही के नतीजों (Quarterly Results) में कंपनियां इस अतिरिक्त खर्च को बैलेंस शीट पर कैसे दिखाती हैं और इसका असर उनके नेट प्रॉफिट पर कितना पड़ता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.