Employees' Provident Fund Organisation ने विड्रॉल के लिए नया यूनिफाइड फ्रेमवर्क लागू किया है। 29 जून, 2026 से प्रभावी इन नियमों के तहत अब आपको अपनी कुल एलिजिबल राशि का कम से कम 25% हिस्सा अकाउंट में बनाए रखना अनिवार्य होगा।
EPFO ने अपनी विड्रॉल प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए Employees' Provident Fund Scheme, 2026 के तहत एक नया और एकीकृत सिस्टम पेश किया है। हालांकि इसे यूजर-फ्रेंडली बनाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन इसके साथ आए सख्त नियमों को समझना आपके फाइनेंशियल प्लानिंग के लिए बेहद जरूरी है।
तीन श्रेणियों में बंटी निकासी
अब विड्रॉल की शर्तों को तीन मुख्य कैटेगरी में बांट दिया गया है: सोशल सिक्योरिटी, हाउसिंग और स्पेशल सर्कमस्टेंस। इसमें मेडिकल इमरजेंसी, शादी, शिक्षा और घर खरीदने या बनाने जैसे काम शामिल हैं। इस बदलाव का मकसद प्रोसेस को सरल बनाना है ताकि लाइफ इवेंट्स के आधार पर निकासी हो सके।
25% रिटेंशन का नया नियम
सबसे बड़ा बदलाव '25% रिटेंशन मैंडेट' है। अब जब भी आप आंशिक निकासी (Partial Withdrawal) करेंगे, तो आपके अकाउंट में आपकी कुल एलिजिबल राशि (जिसमें एम्प्लॉई और एम्प्लॉयर का कॉन्ट्रिब्यूशन और ब्याज शामिल है) का कम से कम 25% हिस्सा सुरक्षित रहना चाहिए। यह नियम आपके रिटायरमेंट कॉर्पस को पूरी तरह खत्म होने से बचाने के लिए एक 'फाइनेंशियल फ्लोर' के तौर पर काम करेगा, ताकि कंपाउंडिंग का फायदा लंबे समय तक बना रहे।
बदल गए वेटिंग पीरियड
EPFO ने फाइनल सेटलमेंट के नियमों को भी कड़ा कर दिया है। नौकरी छोड़ने के बाद अब प्रीमैच्योर फाइनल सेटलमेंट के लिए 12 महीने का वेटिंग पीरियड होगा। वहीं, Employees' Pension Scheme (EPS) के तहत बेनिफिट्स निकालने के लिए अब 36 महीने का लंबा इंतजार करना होगा। यह उन लोगों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है जो नौकरी बदलने के दौरान इमरजेंसी फंड के रूप में PF पर निर्भर रहते हैं।
रिटायरमेंट प्लानिंग पर असर
कुल मिलाकर, EPFO का जोर अब तुरंत कैश देने के बजाय लंबे समय तक कैपिटल सुरक्षित रखने पर है। भविष्य में UPI और WhatsApp के जरिए क्लेम सर्विस को और आसान बनाया जा रहा है, लेकिन क्लेम करने से पहले अपने बैलेंस और इन नए नियमों का ध्यान रखना अब अनिवार्य होगा।
