कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अब प्रधानमंत्री विकसित भारत रोज़गार योजना (PM-VBRY) को ज़मीनी स्तर पर, यानी जिलों में लागू करने की तैयारी कर रहा है। इसका मकसद है कि स्थानीय उद्योगों के हिसाब से युवाओं को ट्रेनिंग मिले और रोज़गार के ज़्यादा अवसर पैदा हों। इस योजना का कुल बजट **₹99,446 करोड़** है और इसका लक्ष्य **2027** तक **3.5 करोड़** नौकरियां पैदा करना है।
जिला स्तर पर रोज़गार को बढ़ावा
EPFO की नई रणनीति के तहत, PM-VBRY योजना को अब स्थानीय स्तर पर लागू किया जाएगा। इसके लिए EPFO ज़िला अधिकारियों और इंडस्ट्री एसोसिएशन्स के साथ मिलकर काम करेगा। ट्रेनिंग प्रोग्राम्स को स्थानीय औद्योगिक ज़रूरतों के अनुसार ढाला जाएगा ताकि युवाओं को तुरंत नौकरी मिल सके।
महत्वाकांक्षी लक्ष्य और इंसेंटिव
सरकार का लक्ष्य 1 अगस्त, 2025 से 31 जुलाई, 2027 के बीच 3.5 करोड़ नई नौकरियां पैदा करना है। इस योजना के तहत, पहली बार नौकरी पाने वाले कर्मचारियों को ₹15,000 तक का एकमुश्त इंसेंटिव मिलेगा। वहीं, नियोक्ताओं (Employers) को हर नए कर्मचारी के लिए हर महीने ₹3,000 तक का इंसेंटिव दिया जाएगा।
स्किल गैप को भरना और स्थानीय भर्ती
इस पहल का एक अहम हिस्सा इंडस्ट्री के नेतृत्व वाला स्किल डेवलपमेंट है। स्थानीय इंडस्ट्री एसोसिएशन्स से सलाह लेकर, EPFO 15 से 30 दिनों के छोटे ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाएगा। ये कोर्स युवाओं को उनके इलाके की कंपनियों में खास भूमिकाओं के लिए तुरंत तैयार करेंगे। इसका मक़सद नौकरी चाहने वालों और कंपनियों की ज़रूरतों के बीच की खाई को पाटना है।
योजना अपनाने में चुनौतियां
भले ही यह योजना फॉर्मल सेक्टर में रोज़गार बढ़ाने के लिए बनाई गई है, लेकिन इसमें कुछ बाधाएं हैं जो इसके असर को सीमित कर सकती हैं। जानकारों और बोर्ड के सदस्यों ने चिंता जताई है कि योजना का ज़्यादा ध्यान मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर है। इससे यह सवाल उठता है कि क्या कृषि और निर्माण जैसे दूसरे रोज़गार-उन्मुख सेक्टरों को पर्याप्त लाभ मिल पाएगा?
इसके अलावा, एक बड़ी समस्या अनुपालन (Compliance) से जुड़ी है। फिलहाल, जिन नियोक्ताओं पर प्रोविडेंट फंड (PF) का बकाया है, वे इस योजना का इंसेंटिव नहीं ले सकते। ऐसी 40,000 से ज़्यादा कंपनियां हैं, जिसके कारण योजना में शामिल होने वाली कंपनियों की संख्या सीमित हो जाती है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज़ (Central Board of Trustees) में अब ऐसी चर्चाएं चल रही हैं कि कैसे इन नियोक्ताओं को अपना बकाया निपटाने या हल निकालने का मौका दिया जाए, ताकि वे इस भर्ती पहल में शामिल हो सकें।
व्यापक आर्थिक परिदृश्य
PM-VBRY एक सरकारी रोज़गार योजना है, न कि कोई लिस्टेड कंपनी। इसलिए, इसका सीधा शेयर बाज़ार पर कोई असर नहीं पड़ता। हालांकि, इस कार्यक्रम की सफलता भारतीय श्रम बाज़ार के फॉर्मलाइज़ेशन की गति को प्रभावित करती है। अगस्त 2026 तक, इस योजना के तहत 15 लाख से ज़्यादा लोगों को रोज़गार मिला है और 72 लाख पहली बार नौकरी पाने वालों का फॉर्मलाइज़ेशन हुआ है। निवेशक और विश्लेषक इन लेबर ट्रेंड्स पर नज़र रखते हैं क्योंकि ये औद्योगिक क्षेत्र के स्वास्थ्य और बेरोज़गारी कम करने के सरकारी प्रयासों को दर्शाते हैं। आगे सबसे अहम अपडेट यह होगा कि क्या नियमों में कोई बदलाव होता है जिससे बकाया राशि वाले नियोक्ता भी इस योजना का लाभ उठा सकें, जो कि फॉर्मल हायरिंग में अचानक बढ़ोतरी दिखा सकता है।
