EPFO ने प्राइवेट प्रॉविडेंट फंड (PF) ट्रस्ट्स के लिए एक वन-टाइम एमनेस्टी स्कीम शुरू की है। जिन संस्थाओं के पास इनकम टैक्स मान्यता तो है लेकिन कानूनी छूट (Exemption) नहीं है, उन्हें **28 दिसंबर, 2026** तक आवेदन करना होगा। यह कदम कंपनियों को कानूनी दांव-पेच और जुर्माने से बचाने में मदद करेगा।
EPFO ने एक बड़ा अनुपालन (Compliance) सुधार अभियान शुरू किया है। इस नई 6 महीने की एमनेस्टी विंडो का मकसद उन प्राइवेट PF ट्रस्ट्स को नियमित करना है जो कानूनी तौर पर ग्रे-एरिया में काम कर रहे थे। यह उन संस्थाओं के लिए एक सुनहरा मौका है जिनके पास इनकम टैक्स से मान्यता तो है, लेकिन 'Employees’ Provident Funds and Miscellaneous Provisions Act, 1952' के तहत औपचारिक छूट (Exemption) का आर्डर नहीं है।
क्यों है यह स्कीम अहम?
अक्सर ऐतिहासिक चूक के कारण कई प्राइवेट ट्रस्ट्स प्रशासनिक जटिलताओं में फंस जाते थे। यह एमनेस्टी स्कीम एक 'रीसेट बटन' की तरह है। इसमें न्यूनतम कर्मचारी संख्या, कुल कॉर्पस साइज और 3 साल के अनुपालन इतिहास जैसी कड़ी शर्तों में छूट दी गई है। इस रियायत से ट्रस्ट्स अपनी छूट की स्थिति को रेट्रोएक्टिव (पिछली तारीख से) आधार पर सुरक्षित कर सकते हैं।
डेडलाइन और जोखिम
कंपनियों के लिए 28 दिसंबर, 2026 की डेडलाइन बेहद महत्वपूर्ण है। यदि कोई ट्रस्ट इस दौरान अपनी स्थिति को सही नहीं करता है, तो उसे सख्त नियामक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। इसमें इनकम टैक्स मान्यता वापस लेना, कानूनी मुकदमेबाजी और भारी वित्तीय जुर्माना शामिल है।
इस प्रक्रिया में EPFO ने 'Institute of Chartered Accountants of India' (ICAI) के साथ हाथ मिलाया है। आवेदनों की बारीकी से जांच की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि ट्रस्ट ने योगदान और ब्याज दरें वैधानिक मानकों के अनुरूप रखी हैं। कंपनियों को सलाह दी जाती है कि वे तुरंत अपने ऑडिटर्स के साथ मिलकर अपनी स्थिति की समीक्षा करें और डेडलाइन से पहले प्रक्रिया पूरी करें।
